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इंद्रधनुष-सत्य की खोज से जीवन के अर्थ तक

ब्रह्मांड, ईश्वर, नैतिकता और मनुष्य
Anoop Pachauri
Type: Print Book
Genre: Philosophy, Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹250 + shipping
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Description

अगर आपने कभी पूछा है—“आख़िर क्यों?”—तो यह पुस्तक आपके लिए है।

ब्रह्मांड कहाँ से आया?
हम इस धरती पर कैसे पहुँचे?
देवताओं का जन्म कैसे हुआ?
जब कोई हमें देख नहीं रहा होता, तब भी हम सही काम क्यों करते हैं?
सत्य को आस्था और भ्रम से कैसे अलग करें?
हम क्यों मरते हैं?
और सबसे कठिन प्रश्न—यदि जीवन का अर्थ पहले से तय नहीं है, तो फिर मेरे जीवन का अर्थ क्या है?

‘इंद्रधनुष’ इन प्रश्नों के तैयार उत्तर देने की कोशिश नहीं करती। यह आपको उनके भीतर उतरने का साहस देती है।

यह यात्रा एक साधारण किसान के आकाश में उमड़ते बादलों से शुरू होती है और ब्रह्मांड की उत्पत्ति के रहस्य तक पहुँचती है। वहाँ से हम विकासवाद के रास्ते मनुष्य की उत्पत्ति तक जाते हैं; आग के चारों ओर बैठी आदिम मानव-सभ्यता से देवताओं के जन्म की कहानी समझते हैं; फिर उस प्रश्न के सामने खड़े होते हैं कि ईश्वर के आने से पहले भी क्या मनुष्य में अच्छाई थी?

आगे की यात्रा और भी कठिन है—सत्य की कसौटी क्या है? क्या किसी बात के प्राचीन होने से वह सत्य हो जाती है? क्या किसी ग्रंथ में लिखे होने से कोई विचार प्रमाणित हो जाता है? और क्या तर्क तथा आस्था हमेशा एक-दूसरे के विरोधी हैं?

इन प्रश्नों को समझने के लिए यह पुस्तक आधुनिक विज्ञान के साथ भारत की अपनी विशाल बौद्धिक परंपरा—वेद, उपनिषद, बुद्ध, महावीर, चार्वाक, कबीर, विवेकानंद और डॉ. आंबेडकर—से संवाद करती है। उद्देश्य किसी आस्था को तोड़ना नहीं, बल्कि उस जगह तक पहुँचना है जहाँ हम अपनी मान्यताओं को भय या परंपरा से नहीं, बल्कि जिज्ञासा, तर्क, प्रमाण और मानवीय संवेदना से देख सकें।

और फिर पुस्तक हमें मृत्यु के सामने खड़ा करती है।

क्योंकि शायद जीवन को समझने के लिए मृत्यु से बड़ा कोई शिक्षक नहीं।

अंततः यह यात्रा बाहर किसी देवता, ग्रंथ या अंतिम उत्तर पर समाप्त नहीं होती। यह वापस हमारे अपने भीतर लौटती है—उस मनुष्य के पास जो प्रश्न पूछ सकता है, संदेह कर सकता है, प्रेम कर सकता है, नैतिक निर्णय ले सकता है और अपने सीमित जीवन को अर्थ दे सकता है।

‘इंद्रधनुष’ उन लोगों के लिए है जो विश्वास करते हुए भी प्रश्न पूछने का साहस रखते हैं, संदेह करते हुए भी अर्थ की तलाश नहीं छोड़ते, और यह मानते हैं कि सत्य किसी एक व्यक्ति, धर्म या परंपरा की निजी संपत्ति नहीं है।

यह पुस्तक आपको किसी निष्कर्ष तक धकेलने नहीं आई है।

यह आपको उस बिंदु तक ले जाने आई है जहाँ से आप स्वयं अपना रास्ता चुन सकें।

क्योंकि यदि जीवन का अर्थ हमें आकाश से तैयार होकर नहीं मिला—

तो शायद उसे खोजने और गढ़ने की जिम्मेदारी हमारी ही है।

About the Author

अनूप पचौरी, शिक्षक, लेखक और जिज्ञासु विचारक हैं। वे दो दशकों से अधिक समय से भारतीय कक्षाओं में विज्ञान, अर्थशास्त्र, तर्क और व्यावहारिक शिक्षा के बीच संवाद स्थापित करते रहे हैं। एम.बी.ए., एम.फिल., एम.एस-सी. और एम.ए. जैसी विविध शैक्षिक पृष्ठभूमि के साथ उनकी रुचि उन प्रश्नों में है जहाँ विज्ञान, दर्शन, समाज और भारतीय बौद्धिक परंपरा एक-दूसरे से संवाद करते हैं।

लेखन के माध्यम से वे जटिल वैज्ञानिक और दार्शनिक विचारों को सरल, सहज और विचारोत्तेजक हिंदी में प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं। उनकी रचनाओं में तर्क, प्रमाण, मानवीय संवेदना और भारतीय चिंतन-परंपरा के बीच संतुलित संवाद प्रमुख है।

Book Details

Publisher: Self-Published
Number of Pages: 108
Dimensions: 5.82"x8.28"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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