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मानव मस्तिष्क की भूलभुलैया

Anoop Pachauri
Type: Print Book
Genre: Self-Improvement, Business & Economics
Language: Hindi
Price: ₹350 + shipping
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Description

मानव मस्तिष्क की भूलभुलैया

1912 में "अडूबने वाला" कहा जाने वाला RMS Titanic अपनी पहली ही यात्रा में डूब गया। 1975 में Kodak के एक इंजीनियर ने डिजिटल कैमरे का आविष्कार किया — और उसकी अपनी कंपनी ने उसे नज़रअंदाज़ करते हुए खुद को दिवालियेपन की ओर धकेल दिया। 2008 में Lehman Brothers, Wall Street का 158 वर्ष पुराना दिग्गज बैंक, रातों-रात ढह गया। और महाभारत में दुर्योधन — शिक्षित और शक्तिशाली होते हुए भी — लगातार अपने ही विनाश की ओर बढ़ता रहा। इन सबको एक ही सूत्र जोड़ता है: बुद्धिमान लोगों द्वारा की गई मूर्खतापूर्ण गलतियाँ।हम गलत निर्णय क्यों लेते हैं, और बेहतर निर्णय कैसे लेना सीखें?

टाइटैनिक डूबा, कोडैक ने अपना ही आविष्कार अनदेखा किया, लेहमैन ब्रदर्स ढह गया, और महाभारत में दुर्योधन सब जानते हुए भी गलत राह चलता रहा। हर बार निर्णय लेने वाले बुद्धिमान लोग थे। तो फिर चूक कहाँ होती है?

मानव मस्तिष्क की भूलभुलैया इसी प्रश्न की पड़ताल है। यह पुस्तक व्यवहारिक अर्थशास्त्र, विकासवादी तंत्रिका-विज्ञान और भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा (गीता, उपनिषद, महाभारत) को एक साथ रखकर समझाती है कि हमारा मस्तिष्क पत्थर युग के लिए बना है, पर निर्णय हमें 21वीं सदी में लेने पड़ते हैं।

चार भागों में आप पढ़ेंगे:

मन की कार्यप्रणाली: सोचने की दो प्रणालियाँ (System 1 और System 2), आदिमानव मस्तिष्क और प्रोत्साहन का असर।
छह महान जाल: हानि-भय, आत्म-धोखा, जिद और प्रतिबद्धता, भीड़ का मनोविज्ञान, विज्ञापन-ब्रांड का दबाव और जुए की मानसिकता।
स्वयं से परे का संसार: पसंद और प्रेम का भ्रम, तथा धन, सफलता और खुशी का मनोविज्ञान।
बेहतर सोच का मार्ग: डार्विन और आइंस्टाइन की सोचने की आदतें, मानसिक मॉडल और रूपांतरण की यात्रा।

हर अध्याय में शोध, ऐतिहासिक केस स्टडी, भारतीय संदर्भ (शेयर बाज़ार, रियल एस्टेट, पारिवारिक व्यापार, WhatsApp की भीड़ आदि), आत्मविश्लेषण के प्रश्न और व्यावहारिक रणनीतियाँ हैं, जैसे Pre-Mortem, Decision Journal और Devil’s Advocate।

यह पुस्तक युवा निवेशकों, व्यवसायियों और प्रबंधकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और उन सभी के लिए है जो जानना चाहते हैं: "मैंने यह क्यों किया?"

यह हिंदी पुस्तक उसी प्रश्न की तह तक जाती है जो इसे प्रेरित करता है: हम जानते हुए भी गलत निर्णय क्यों लेते हैं?

इसे बाकी किताबों से अलग करने वाली बात है इसका दूसरा सूत्र: यह आधुनिक व्यवहार-विज्ञान को गीता, उपनिषद और महाभारत के साथ जोड़ती है — यह दिखाते हुए कि "फल की चिंता किए बिना कर्म करो" एक Pre-commitment Strategy है, और भारतीय दर्शन का "विवेक" ही आधुनिक विज्ञान का Metacognition है।

चार भागों में फैले 16 अध्यायों में, यह पुस्तक हर जाल के साथ परखी हुई, व्यावहारिक रणनीतियाँ भी देती है, और अंत में एक 30-दिवसीय आत्म-प्रशिक्षण योजना के साथ समाप्त होती है। यह निवेशकों, पेशेवरों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और हर जिज्ञासु पाठक के लिए लिखी गई है — हर उस व्यक्ति के लिए जो अपने ही मस्तिष्क की भूलभुलैया का नक्शा बनाने को तैयार है।

About the Author

अनूप पचौरी शिक्षक, लेखक और कंटेंट निर्माता हैं। वे पिछले एक दशक से अधिक समय से व्यवहारिक अर्थशास्त्र, तंत्रिका-विज्ञान और अप्लाइड साइकोलॉजी के जटिल विचारों को सरल, व्यावहारिक हिंदी में प्रस्तुत कर रहे हैं। उनकी मूल जिज्ञासा यह रही है: मनुष्य जानते हुए भी गलत क्यों करता है? वे MBA प्रवेश परीक्षाओं (IPM, CAT) के लिए प्रतियोगी परीक्षा सामग्री बनाते हैं, जिसका उपयोग देश भर के विद्यार्थी करते हैं। उन्हें पुस्तक प्रकाशन का व्यापक अनुभव है। वे आधुनिक पश्चिमी मनोविज्ञान और गीता, उपनिषद व महाभारत की प्राचीन सीख को जोड़कर लिखते हैं। उनका मानना है कि ज्ञान केवल उच्च शिक्षित वर्ग तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जागो, सोचो, सीखो।

Book Details

Publisher: Self-Published
Number of Pages: 203
Dimensions: 5.82"x8.28"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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