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सृष्टि का आविष्कार

सृष्टि के मिथक, धार्मिक सत्ता, मानवीय अज्ञान और सत्य की वैज्ञानिक खोज
Anoop Pachauri
Type: Print Book
Genre: Politics & Society, Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹700 + shipping
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Description

हम कहाँ से आए? यह संसार कैसे बना? बेबीलोन के लोगों ने क्यों माना कि मनुष्य मिट्टी से बना है और उस मिट्टी में एक मारे गए देवता का रक्त मिला था? वैदिक कवियों ने संसार को एक विराट पुरुष की बलि से उपजा क्यों कहा, और फिर उसी साँस में यह भी क्यों पूछ लिया कि क्या देवता भी जानते हैं कि यह सब कैसे शुरू हुआ?

सृष्टि का आविष्कार इसी प्रश्न की यात्रा है। यह पुस्तक दो अलग सवाल अलग-अलग रखती है। पहला सवाल है कि लोगों ने किसी बात को मानना क्यों शुरू किया। दूसरा है कि क्या उसके सच होने का कोई प्रमाण है। पहले का उत्तर इतिहास और मनोविज्ञान में मिलता है, दूसरे का चट्टानों, जीवाश्मों, जीनों और तारों में।

पाँच भागों और अट्ठाईस अध्यायों में आप देखेंगे:

डर, जिज्ञासा और मृत्यु से सृष्टि-कथाएँ कैसे जन्मीं, और कथा पवित्र सत्य कैसे बनी
हिंदू, अब्राहमी, बौद्ध-जैन और अफ़्रीका, एशिया, अमेरिका और ओशिनिया की परंपराएँ, सब एक ही कसौटी पर
जब कथा अधिकार बनी: पुरोहित, सत्ता, धन, जाति, नस्ल और प्रश्न पूछने वालों का दमन
विज्ञान अतीत को कैसे पढ़ता है: मानव-विकास, DNA, भारत में मानव-उत्पत्ति, पृथ्वी और ब्रह्मांड की आयु
पहले मनुष्य, चमत्कार, प्रकाशना, प्राचीन ज्ञान और नैतिकता के दावे, प्रमाण के आमने-सामने

पुस्तक हर महत्त्वपूर्ण दावे पर बताती है कि प्रमाण कितना मज़बूत है: स्थापित, संभावित, विवादित या अज्ञात। यह विज्ञान की ग़लतियों और सीमाओं पर भी उतनी ही ईमानदारी से बात करती है।

यह पुस्तक धर्म-विरोधी नहीं है, और किसी की आस्था का मज़ाक नहीं उड़ाती। यह समझ, प्रश्न, प्रमाण और स्वतंत्र सोच का आमंत्रण है। जिज्ञासु पाठकों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और उन सभी के लिए, जो मानने के पीछे का "क्यों" जानना चाहते हैं।

About the Author

अनूप पचौरी शिक्षक, लेखक और स्वतंत्र चिंतक हैं। उन्होंने भारतीय राजस्व सेवा में कार्य किया है और उनके पास MBA, M.Phil., M.Sc. तथा M.A. की उपाधियाँ हैं। वे सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थियों को नीतिशास्त्र पढ़ाते हैं और CA फ़ाउंडेशन, CLAT तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक सामग्री बनाते हैं। विज्ञान और अध्यात्म के संबंधों को खोजने वाली एक गैर-लाभकारी संस्था भी उन्होंने चलाई है।

विज्ञान, समाज, शिक्षा, धर्म और मानवीय चेतना पर वे हिंदी और अंग्रेज़ी में लिखते हैं। उनका उद्देश्य जटिल प्रश्नों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रमाण-आधारित भाषा में पाठकों तक पहुँचाना है, ताकि हम अधिक विवेकपूर्ण, मानवीय और न्यायपूर्ण समाज की कल्पना कर सकें। उनका जीवन-सूत्र है: श्रद्धा से ऊपर सत्य; भय से ऊपर विवेक।

Book Details

Publisher: Self-Published
Number of Pages: 594
Dimensions: 5.82"x8.28"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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