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कर्म ही भाग्य है

अपना भाग्य खुद लिखना सीखो
Anupriya Srivastav (Rozy)
Type: Print Book
Genre: Self-Improvement
Language: Hindi
Price: ₹149 + shipping
This book ships within India only.
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Description

क्या सच में भाग्य पहले से लिखा होता है? या हम खुद अपना भाग्य लिख सकते हैं?

हम में से ज्यादातर लोग पूरी जिंदगी इसी भ्रम में बिता देते हैं कि हमारी किस्मत खराब है। कोई नज़र की बात करता है, कोई टोटके की, तो कोई कुंडली को दोष देता है।

लेकिन सच्चाई कुछ और है।

"कर्म ही भाग्य है" एक किताब नहीं, एक आईना है। ये किताब आपको बताएगी कि कैसे आपकी सोच, आपके शब्द और आपके छोटे-छोटे कर्म ही आपका बड़ा भाग्य बनाते हैं।

इस किताब में आप जानेंगे:

✓ भाग्य क्या है? भ्रम या सच्चाई?
✓ कर्म कैसे बनता है और उसका फल कब मिलता है?
✓ गरीब और अमीर की सोच में क्या फर्क होता है?
✓ नज़र, टोटका और कुंडली का सच क्या है?
✓ लोग मेहनत करके भी क्यों हार जाते हैं?
✓ लक्ष्मी किसके पास आती है और टिकती क्यों नहीं?
✓ पितरों के कर्म का आपके जीवन पर क्या असर पड़ता है?
✓ अपना भाग्य खुद कैसे लिखें - रोज़ के 3 प्रैक्टिकल वचन

ये किताब पंडितों, अंगूठियों और ताबीजों की कहानी नहीं सुनाती। ये आपको खुद का पंडित बनना सिखाती है।

अगर आप भी अपनी किस्मत को कोसना बंद करके, उसे बनाना शुरू करना चाहते हैं, तो ये किताब आपके लिए ही लिखी गई है।

भगवान ने आपको पेन नहीं, पेंसिल दी है। अब रबड़ आपके हाथ में है।

लेखिका: अनुप्रिया श्रीवास्तव | आजमगढ़

About the Author

अनुप्रिया श्रीवास्तव एक लेखिका, मोटिवेशनल स्पीकर और लाइफ-कोच हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, विभिन्न सामाजिक और पारिवारिक विषय, अध्यात्म और जीवन-दर्शन उनके लेखन के मुख्य विषय हैं। वे भारतीय संस्कृति, कर्म-विज्ञान और सकारात्मक जीवन-शैली पर सरल भाषा में लिखती हैं। 'कर्म ही भाग्य है' उनकी चर्चित पुस्तकों में से एक है, जिसके माध्यम से वे लोगों को अपने भाग्य को स्वयं लिखने के लिए प्रेरित करती हैं।

Book Details

Publisher: अनुप्रिया श्रीवास्तव
Number of Pages: 50
Dimensions: A5
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Saddle Stitched)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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