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क्या सच में भाग्य पहले से लिखा होता है? या हम खुद अपना भाग्य लिख सकते हैं?
हम में से ज्यादातर लोग पूरी जिंदगी इसी भ्रम में बिता देते हैं कि हमारी किस्मत खराब है। कोई नज़र की बात करता है, कोई टोटके की, तो कोई कुंडली को दोष देता है।
लेकिन सच्चाई कुछ और है।
"कर्म ही भाग्य है" एक किताब नहीं, एक आईना है। ये किताब आपको बताएगी कि कैसे आपकी सोच, आपके शब्द और आपके छोटे-छोटे कर्म ही आपका बड़ा भाग्य बनाते हैं।
इस किताब में आप जानेंगे:
✓ भाग्य क्या है? भ्रम या सच्चाई?
✓ कर्म कैसे बनता है और उसका फल कब मिलता है?
✓ गरीब और अमीर की सोच में क्या फर्क होता है?
✓ नज़र, टोटका और कुंडली का सच क्या है?
✓ लोग मेहनत करके भी क्यों हार जाते हैं?
✓ लक्ष्मी किसके पास आती है और टिकती क्यों नहीं?
✓ पितरों के कर्म का आपके जीवन पर क्या असर पड़ता है?
✓ अपना भाग्य खुद कैसे लिखें - रोज़ के 3 प्रैक्टिकल वचन
ये किताब पंडितों, अंगूठियों और ताबीजों की कहानी नहीं सुनाती। ये आपको खुद का पंडित बनना सिखाती है।
अगर आप भी अपनी किस्मत को कोसना बंद करके, उसे बनाना शुरू करना चाहते हैं, तो ये किताब आपके लिए ही लिखी गई है।
भगवान ने आपको पेन नहीं, पेंसिल दी है। अब रबड़ आपके हाथ में है।
लेखिका: अनुप्रिया श्रीवास्तव | आजमगढ़
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