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मर्यादा - रिश्ते, समाज और आत्मा की लक्ष्मण रेखा

रिश्ते, समाज और आत्मा की लक्ष्मण रेखा
Anupriya Srivastav (Rozy)
Type: Print Book
Genre: Parenting & Families
Language: Hindi
Price: ₹199 + shipping
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Description

> यह पुस्तक मर्यादा के उन अनंत सूत्रों की कहानी है जो जीवन को दिशा, संस्कार और संतुलन प्रदान करते हैं।
> समाज, परिवार और व्यक्तिगत जीवन में मर्यादा का क्या महत्व है - इसे सरलता और गहराई से समझाती यह रचना हमें अपने कर्तव्यों, संबंधों और आत्मसम्मान के प्रति जागरूक करती है।
> लेखिका ने अपने अनुभवों और विचारों के मंथन से पीरा और आधुनिकता के बीच संतुलन साधते हुए मानवीय मूल्यों, नैतिकता और जीवन जीने की सही दिशा को उजागर किया है।
> यह पुस्तक हर उस व्यक्ति के लिए है जो जीवन में सत्य, प्रेम और मर्यादा को सर्वोपरि मानता है।

क्या आधुनिकता की दौड़ में हम अपनी जड़ों को भूलते जा रहे हैं?
क्या रिश्तों की डोर कमजोर हो रही है?

'मर्यादा' सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कला है। इस पुस्तक में लेखिका अनुप्रिया श्रीवास्तव (रोज़ी) ने बड़े ही सरल और भावपूर्ण शब्दों में बताया है कि कैसे मर्यादा में रहकर भी हम एक सफल, खुशहाल और सम्मानित जीवन जी सकते हैं।

इस पुस्तक में आप जानेंगे:
- रिश्तों में मर्यादा क्यों जरूरी है?
- समाज में अपनी पहचान और सम्मान कैसे बनाएं?
- आत्मा की आवाज और मन की दुविधा में सही चुनाव कैसे करें?
- आधुनिक सोच और भारतीय संस्कारों के बीच संतुलन

यह किताब हर गृहिणी, युवा, विद्यार्थी और उस हर पाठक के लिए एक मार्गदर्शक है जो जीवन को गहराई से समझना चाहता है।

> जब रिश्ते उलझ जाएं और समाज सवाल करे, तब मर्यादा ही है जो आपको सही दिशा दिखाती है।

About the Author

अनुप्रिया श्रीवास्तव, जिन्हें साहित्य जगत में 'रोज़ी' के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रसिद्ध लेखिका, विचारक और प्रेरक वक्ता हैं। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से संबंध रखने वाली अनुप्रिया जी ने अपने लेखन की शुरुआत व्यक्तिगत डायरी और कविताओं से की थी, जो धीरे-धीरे सामाजिक सरोकारों की एक सशक्त अभिव्यक्ति बन गई।

एक विचारक के रूप में वे मानती हैं कि आज के दौर में जब रिश्ते बाजारू होते जा रहे हैं, तब 'मर्यादा' ही वह एकमात्र सेतु है जो परिवार और समाज को जोड़े रख सकती है। उनकी रचनाओं में नारी मन की कोमलता, एक माँ का त्याग, और एक जागरूक नागरिक की चिंता स्पष्ट रूप से झलकती है।

वे नियमित रूप से महिला सशक्तिकरण, पारिवारिक मूल्यों और युवा पीढ़ी में संस्कारों के महत्व पर अपने विचार साझा करती रहती हैं। 'मर्यादा' के माध्यम से वे हर पाठक तक यह संदेश पहुँचाना चाहती हैं कि आधुनिक बनने का अर्थ अपनी जड़ों को भूलना नहीं है।
इनकी अन्य सभी पुस्तकें पारिवारिक, सामाजिक, संस्कारों के लिए, रिश्तों को सुधारने के लिए, विद्यार्थियों के लिए लिखी गई हैं।

Book Details

Publisher: Anupriya Srivastav
Number of Pages: 72
Dimensions: A5
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

Ratings & Reviews

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