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"इस देश में मनुष्य दो बार मरता है। एक बार जब उसकी श्वास टूटती है, और दूसरी बार जब कागज़ पर उसका नाम कटता है।"
इस संग्रह में पाँच कहानियाँ हैं। 'कागज पर मुर्दा' - उस आदमी की कहानी जो सरकारी कागज़ पर तीन साल पहले मर चुका है, 'चौखट पर धूप' - उस इंतजार की कहानी जो हर घर की चौखट पर बैठी है, और ऐसी ही तीन और कहानियाँ - जो गाँव, गरीबी और व्यवस्था के बीच फँसे हुए आम आदमी की सच्ची तस्वीर दिखाती हैं।
गाँव की मिट्टी, खेतों की धूल और सिस्टम की उलझनों से बुनी हुई कहानियाँ।
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