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इस पुस्तक में लेखिकाने ज्ञानेश्वरी से मिली प्रेरणा को अपने जीवन और साधना से जोड़ते हुए मिट्टी के साथ अपने रचनात्मक सफर को बहुत सुंदर ढंग से व्यक्त किया है। ज्ञान से मिट्टी तक और मिट्टी से आत्मबोध तक की यह यात्रा मानो सृजन के माध्यम से मुक्ति की ओर बढ़ने का एक शांत, गहरा और अर्थपूर्ण मार्ग बन जाती है।
संघर्षों की आँच में तपकर निखरी आशा जी के जीवन की यह प्रेरणादायक और सुंदर कहानी मन को गहराई से छू जाती है। जीवन के हर कठिन दौर में मजबूती से खड़े रहकर उसका सामना करना और अंततः उससे पार पाना, और फिर अपने सपनों को दोबारा जीकर उन्हें साकार करने का साहस—यह सब पढ़कर मन सचमुच भीग जाता है।
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