You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
कुछ लोग मर जाते हैं।
कुछ लोग गायब हो जाते हैं।
और कुछ...
धीरे-धीरे दुनिया की यादों से मिटने लगते हैं।
पहले लोग उनका नाम भूलते हैं।
फिर उनकी आवाज़।
फिर उनका चेहरा।
और एक दिन वे खुद भी भूल जाते हैं कि वे कौन थे।
उसने अपनी आँखों के सामने एक लड़की को टुकड़ों में बिखरते देखा था।
लेकिन उसके हर टुकड़े के साथ उसकी अपनी यादें भी गायब होने लगीं।
अब उसके पास सिर्फ एक अधूरा नाम, कुछ बिखरे हुए टुकड़े, और एक सवाल है—
अगर किसी इंसान का अस्तित्व पूरी तरह मिट जाए... तो क्या वह सचमुच कभी था भी?
याद रखना।
अगर तुम माया को ढूँढने निकलो...
तो हो सकता है रास्ते में खुद को खो दो।
404 : HUMAN NOT FOUND
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book 404 : HUMAN NOT FOUND.