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मेरी आत्मकथा

गाँव के क्लासरूम से जयपुर की लाइब्रेरी तक: एक नॉन-कॉलेजिएट छात्र का प्रतियोगी संघर्ष
Dayaram Sirra
Type: Print Book
Genre: Education & Language, Biographies & Memoirs
Language: Hindi
Price: ₹399 + shipping
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Description

यह कहानी सिर्फ मेरी नहीं, यह कहानी है हर उस युवा की जो अपनी आँखों में बड़े शहर के सपने लेकर अपनी मिट्टी छोड़ता है।"
​कक्षा 12वीं तक गाँव के सरकारी स्कूल के सीधे-साधे माहौल से निकलकर, राजस्थान की राजधानी जयपुर की व्यस्त सड़कों और शांत लाइब्रेरियों तक का सफर आसान नहीं था। 'मेरी आत्मकथा' एक ऐसे ही आम लड़के की सच्ची और अनकही दास्तान है, जिसने अपनी पढ़ाई के स्तर को खुद अपने दम पर आगे बढ़ाया।
​राजस्थान यूनिवर्सिटी से नॉन-कॉलेजिएट (Non-Collegiate) रहकर कॉलेज के फाइनल ईयर की पढ़ाई को संभालना और उसी वक्त बिना थमे, बिना रुके एसएससी (SSC) जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षा के लिए दिन-रात एक करना—यह किताब उस रोज़ के अकेले संघर्ष, असफलताओं के बीच छिपे हौसले और सरकारी नौकरी की आस में जलती उम्मीदों का एक जीवंत दस्तावेज़ है। नौकरी अभी मिली नहीं है, जंग अभी अधूरी है, लेकिन मैदान में डटे रहने का जज्बा अटूट है। गाँव की सादगी से लेकर जयपुर की कड़कती धूप में तपने तक के इस प्रेरणादायक सफरनामे में आपका स्वागत है।

About the Author

दयाराम सिर्रा राजस्थान के दौसा जिले के एक छोटे से गाँव गढ़ोरा के रहने वाले हैं और वर्तमान में जयपुर (जगतपुरा) को अपनी कर्मभूमि बनाए हुए हैं। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े दयाराम आज के डिजिटल दौर के एक उभरते हुए डिजिटल क्रिएटर और यूट्यूबर हैं, जो अपनी जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं।
​राजस्थान यूनिवर्सिटी के बीए (समाजशास्त्र) फाइनल ईयर के छात्र होने के साथ-साथ वे एक समर्पित प्रतियोगी (SSC एस्पिरेंट) भी हैं। अपनी पढ़ाई और रचनात्मकता के अनूठे तालमेल के साथ, वे इस किताब के ज़रिए अपने जीवन के उतार-चढ़ाव, छात्र जीवन की तपस्या और एक आम लड़के के असाधारण हौसले को दुनिया के सामने रख रहे हैं। यह उनकी पहली किताब है।

Book Details

Publisher: Dayaram Sirra
Number of Pages: 207
Dimensions: A5
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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