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यह कहानी सिर्फ मेरी नहीं, यह कहानी है हर उस युवा की जो अपनी आँखों में बड़े शहर के सपने लेकर अपनी मिट्टी छोड़ता है।"
कक्षा 12वीं तक गाँव के सरकारी स्कूल के सीधे-साधे माहौल से निकलकर, राजस्थान की राजधानी जयपुर की व्यस्त सड़कों और शांत लाइब्रेरियों तक का सफर आसान नहीं था। 'मेरी आत्मकथा' एक ऐसे ही आम लड़के की सच्ची और अनकही दास्तान है, जिसने अपनी पढ़ाई के स्तर को खुद अपने दम पर आगे बढ़ाया।
राजस्थान यूनिवर्सिटी से नॉन-कॉलेजिएट (Non-Collegiate) रहकर कॉलेज के फाइनल ईयर की पढ़ाई को संभालना और उसी वक्त बिना थमे, बिना रुके एसएससी (SSC) जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षा के लिए दिन-रात एक करना—यह किताब उस रोज़ के अकेले संघर्ष, असफलताओं के बीच छिपे हौसले और सरकारी नौकरी की आस में जलती उम्मीदों का एक जीवंत दस्तावेज़ है। नौकरी अभी मिली नहीं है, जंग अभी अधूरी है, लेकिन मैदान में डटे रहने का जज्बा अटूट है। गाँव की सादगी से लेकर जयपुर की कड़कती धूप में तपने तक के इस प्रेरणादायक सफरनामे में आपका स्वागत है।
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