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**रुचि सेतु** केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि दोस्ती, सपनों, बिछड़ने और यादों से बने उस पुल की कहानी है, जो समय के साथ और भी मजबूत होता जाता है।
सन् 2008 में अजमेर के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में अयान और रुचि की पहली मुलाकात होती है। किताबों, कैंटीन की चाय, अधूरी असाइनमेंट्स और दोस्तों की शरारतों के बीच एक मासूम-सा रिश्ता धीरे-धीरे प्रेम में बदल जाता है। उनके साथ हैं आकाश, सानिया, भरत और श्रुति—ऐसे दोस्त, जो हर खुशी और हर मुश्किल में एक-दूसरे का सहारा बनते हैं।
कॉलेज के चार साल हँसी, सपनों और यादों में बीत जाते हैं, लेकिन किस्मत की एक अनचाही करवट उनकी दुनिया बदल देती है। जब सब कुछ खत्म होता हुआ लगता है, तब अयान समझता है कि सच्चा प्रेम किसी के साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि उसके सपनों को अपने जीवन का उद्देश्य बना लेने का नाम है।
**"रुचि सेतु"** प्रेम, दोस्ती और उम्मीद की ऐसी भावनात्मक यात्रा है, जो बताती है कि कुछ लोग हमारे जीवन से भले ही दूर हो जाएँ, लेकिन उनकी यादें हमारे भीतर एक ऐसे पुल का निर्माण करती हैं, जो हमें हर कठिनाई में आगे बढ़ने की ताकत देता है।
यह उपन्यास उन सभी के लिए है जिन्होंने कभी सच्चा प्रेम किया है, किसी अपने को खोया है, या फिर यादों में जीती हुई किसी मुस्कान को आज भी अपने दिल में संजोए रखा है।
**क्योंकि कुछ कहानियाँ अधूरी होकर भी हमेशा के लिए पूरी हो जाती हैं।**
**— दीपेश**
*लेखक*
**अधूरी थाली, प्यार पूरा**
**रुचि सेतु** ❤️
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