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फल्गु का नीरव अनुराग और अन्य कहानियाँ मगध की ऐतिहासिक लोक-स्मृति, बदलते ग्रामीण यथार्थ और पाठशाला की चारदीवारी के भीतर धड़कते संवेदनशील बाल-मनोविज्ञान का एक अनूठा साहित्यिक संकलन है।यह संकलन तीन वैचारिक खंडों और १५ सशक्त कहानियों में विभाजित है:खंड १: इतिहास, मर्यादा और मगध की अंतःसलिला — टिकारी राज के आत्मसम्मान और फल्गु के नीरव त्याग से लेकर, सामाजिक ताने-बाने, जातीय टकराव और माटी से उखड़कर परदेस की ओर पलायन का जीवंत आख्यान।खंड २: पाठशाला, बाल-मनोविज्ञान और शिक्षा के रंग — बस्ते के भारी बोझ तले सहमी मासूम आँखें, रटंत प्रणाली के बरक्स बचपन की बेबाक आज़ादी, कॉरपोरेट शिक्षा-तंत्र का खोखलापन और बचपन के अनमोल साथियों (सलेट, चप्पल, कलम) की सोंधी स्मृतियाँ।खंड ३: परदेस, परिवार और आत्मीय प्रसंग — आधुनिक ग्रामीण अर्थशास्त्र के रोचक व्यंग्य, बिखरते आधुनिक रिश्ते, जीवन के रहस्यवादी संस्मरण, वर्षा का काव्यात्मक आह्वान और पूर्वोत्तर की आर्द्र-भूमि सोनबिल में खिले कमल की अलौकिक अनुभूति।ऊपर से समाज और व्यवस्था चाहे जितनी कठोर या सूखी क्यों न दिखे, भीतर करुणा, त्याग और मानवीय गरिमा की अंतःसलिला निरंतर बहती रहती है। इतिहास, समाज और मानवीय संवेदनाओं को एक सूत्र में पिरोता यह संग्रह हर संवेदनशील पाठक के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है।
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