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Kal fir suraj niklega

Ek lekhak ki nahi ek zindagi ki kahani
Dilip Patel
Type: Print Book
Genre: Biographies & Memoirs
Language: Hindi
Price: ₹699 + shipping
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Description

“कल फिर सूरज निकलेगा” केवल एक किताब नहीं, बल्कि संघर्ष, उम्मीद, रिश्तों और जीवन के उतार-चढ़ाव से भरी एक सच्ची यात्रा है।

यह पुस्तक एक ऐसे इंसान की कहानी कहती है जिसने कठिन परिस्थितियों, आर्थिक चुनौतियों, सामाजिक दबावों और जीवन की अनगिनत परीक्षाओं का सामना किया, लेकिन रुकना नहीं सीखा।

जब हालात मुश्किल थे, रास्ते धुंधले थे और उम्मीदें कमजोर पड़ रही थीं, तब भी भीतर एक विश्वास जीवित रहा हर अंधेरी रात के बाद सूरज फिर निकलता है।

इस पुस्तक के हर अध्याय में जीवन का एक अनुभव, एक सीख और एक एहसास छुपा है। यह कहानी केवल लेखक की नहीं, उन सभी लोगों की है जो कभी टूटे हैं, संघर्ष किया है और फिर खुद को दोबारा खड़ा किया है।

यदि आपने कभी हार महसूस की है…यदि जीवन ने आपको परखा है…यदि आप फिर से उठने की ताकत ढूंढ रहे हैं…तो यह पुस्तक आपके लिए है। क्योंकि कहानी चाहे कितनी भी कठिन हो, अंत हमेशा अंधेरा नहीं होता। कभी न कभी…
कल फिर सूरज निकलेगा।

About the Author

दिलीप पटेल एक लेखक हैं जिनके लेखन की जड़ें वास्तविक जीवन के अनुभवों, संघर्षों और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी हैं। उन्होंने लेखन को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को समझने और दूसरों तक उम्मीद पहुंचाने का साधन बनाया है। साधारण जीवन से असाधारण सीख निकालना उनकी लेखनी की खास पहचान है।

दिलीप पटेल का विश्वास है कि शब्द केवल पढ़ने के लिए नहीं होते वे किसी का हौसला बन सकते हैं, किसी को संभाल सकते हैं और किसी की सोच बदल सकते हैं। उनकी रचनाओं में संघर्ष है, संवेदना है, समाज की सच्चाई है और सबसे बढ़कर उम्मीद है।

उनका उद्देश्य केवल किताबें लिखना नहीं, बल्कि पाठकों के दिलों तक पहुंचकर उन्हें यह याद दिलाना है
अंधेरा चाहे कितना भी गहरा हो, रोशनी लौटती जरूर है।

Book Details

Publisher: Self-published
Number of Pages: 292
Dimensions: 6.00"x9.00"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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