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वर्दी के पीछे एक जिंदगी एक स्टेनोग्राफर की चार दशक लंबी यात्रा

एक स्टेनोग्राफर की चार दशक लंबी यात्रा
Dr Abhay Bhatia
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction
Language: Hindi
Price: ₹279 + shipping
This book ships within India only.
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Description

हर जीवन अपने भीतर एक कहानी लेकर चलता है।
कुछ कहानियाँ शब्दों में कही जाती हैं और कुछ उम्र भर मन के भीतर चुपचाप चलती रहती हैं।

यह पुस्तक मेरी उसी अनकही यात्रा को शब्द देने का एक विनम्र प्रयास है।

पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है कि जीवन ने मुझे कभी एक सीधी राह नहीं दी। कहीं नया शहर था, कहीं नई जिम्मेदारी, कहीं अनजान चेहरे थे तो कहीं ऐसे लोग मिले जो धीरे-धीरे अपने बन गए। कभी घर से दूर रहने का अकेलापन था, कभी परिवार के साथ होने की खुशी। कभी नौकरी की जिम्मेदारियाँ थीं, कभी बच्चों के भविष्य की चिंता और कभी अपने ही भीतर उठते अनेक सवाल।

वर्ष 1982 में लखनऊ से शुरू हुई मेरी सेवा-यात्रा ने मुझे अनेक शहरों और परिस्थितियों से परिचित कराया। समय आगे बढ़ता गया और जीवन भी अपने साथ बहुत कुछ बदलता गया। स्थान बदले, पद बदले, लोग बदले, परिस्थितियाँ बदलीं, लेकिन स्मृतियाँ भीतर कहीं जमा होती रहीं।

मार्च 2018 में जब सेवा का अंतिम दिन आया और वर्षों की व्यस्त दिनचर्या अचानक पीछे छूटने लगी, तब पहली बार महसूस हुआ कि जिस जीवन को हम रोजमर्रा की नौकरी समझकर जीते रहते हैं, वह वास्तव में हमारी पहचान का कितना बड़ा हिस्सा बन चुका होता है।

उस दिन लगा कि नौकरी समाप्त हुई है,
लेकिन कहानी नहीं।

शायद उसी क्षण से मेरे भीतर अतीत की ओर लौटने की एक यात्रा शुरू हुई।

एक-एक करके पुराने शहर याद आने लगे।
पुराने कार्यालय याद आए।
साथ काम करने वाले लोग याद आए।
मित्रों के साथ बिताए छोटे-छोटे पल याद आए।
घर से दूर बिताई रातें याद आईं।
माँ-पिता की चिंता याद आई।
पत्नी और बच्चों से जुड़ी जिम्मेदारियाँ याद आईं।
और वे लोग भी याद आए जो कभी जीवन में बहुत करीब थे, लेकिन समय की धारा उन्हें कहीं दूर ले गई।

स्मृतियों का संसार भी कितना विचित्र है।

कभी कोई शहर हमें बिल्कुल पसंद नहीं आता, लेकिन वही शहर बाद में जीवन का सबसे लंबा पड़ाव बन जाता है। कभी कोई व्यक्ति पहली मुलाकात में सामान्य-सा लगता है, लेकिन वर्षों बाद उसकी एक छोटी-सी बात भी यादों में पूरी तरह जीवित मिलती है। कभी किसी दिन की साधारण-सी घटना, समय बीतने के बाद जीवन की सबसे महत्वपूर्ण स्मृति बन जाती है।

इन्हीं छोटी-बड़ी स्मृतियों को जोड़कर यह पुस्तक आकार ले रही है।

इस यात्रा में मेरी आस्था हमेशा मेरे साथ रही है।

About the Author

डॉ. अभय भाटिया एक शिक्षाविद्, शोधकर्ता एवं लेखक हैं। उन्होंने कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की है तथा इसी क्षेत्र में लंबे समय से शिक्षण एवं शोध कार्य से जुड़े हुए हैं। उन्होंने पीएच.डी. के साथ पोस्ट-डॉक्टोरल शोध भी किया है। उनका शोध एवं अकादमिक कार्य विशेष रूप से Wireless Sensor Networks, Internet of Things, Artificial Intelligence, Machine Learning और उभरती तकनीकों से संबंधित रहा है।

शिक्षण और अनुसंधान के साथ-साथ साहित्य एवं रचनात्मक लेखन में भी उनकी विशेष रुचि है। मानवीय संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों, रिश्तों, स्मृतियों और समय के बदलते स्वरूप को सहज एवं आत्मीय भाषा में अभिव्यक्त करना उनके लेखन की प्रमुख विशेषता है।

तकनीकी क्षेत्र से जुड़े होने के बावजूद उनका साहित्यिक दृष्टिकोण जीवन के मानवीय पक्ष पर केंद्रित है। उनके लिए लेखन केवल शब्दों की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि अनुभवों को समझने, स्मृतियों को सँजोने और पाठकों से भावनात्मक संवाद स्थापित करने का माध्यम है।

Book Details

ISBN: 9789359373744
Publisher: Abhay Bhatia
Number of Pages: 214
Dimensions: 6"x9"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

Ratings & Reviews

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