You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
सह-अस्तित्व, करुणा और अटूट प्रेम की एक अद्भुत गाथा!
'शांतिवन' केवल एक जंगल की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे आदर्श और शांतिपूर्ण संसार की यात्रा है जहाँ ईर्ष्या, द्वेष और भय का कोई स्थान नहीं है। अक्सर हम जंगलों को केवल 'शिकारी और शिकार' के हिंसक नियमों से जोड़कर देखते हैं, लेकिन डॉ. अनुराधा बालियान ने इस पुस्तक के माध्यम से एक बेहद खूबसूरत और भिन्न कल्पना को साकार किया है।
यह कहानी है 'शांतिवन' की, जहाँ एक वृद्ध और बुद्धिमान हाथी 'सोन दादा' और वन के मुख्य संरक्षक व अनुभवी भालू 'भोलू दादा' अपनी बुद्धिमत्ता और प्रेम से पूरे जंगल को एकता के सूत्र में पिरोते हैं। इस वन में हाथी, घोड़े, ऊँट, बंदर, हिरन, खरगोश, सियार और पक्षी—सभी इंसानी क्रूरता और दुनिया के सताए हुए जीव अपने आपसी मतभेदों को भुलाकर एक परिवार की तरह रहते हैं और एक-दूसरे के सुख-दुख साझा करते हैं।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book शांतिवन.