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'अश्क़ों की स्याही' महज़ ग़ज़लों का एक मजमूआ नहीं, बल्कि रूह की ख़ामोश सदाओं, दिल के अनकहे जज़्बात और ज़िंदगी के गहरे तजुर्बात का इज़हार है।
इस किताब की हर ग़ज़ल मोहब्बत, हिज्र, वफ़ा, तन्हाई, सब्र, उम्मीद और इंसानी रिश्तों की नज़ाकत को अल्फ़ाज़ का लिबास पहनाती है। कहीं दुआ है, कहीं शिकवा; कहीं इंतज़ार की शिद्दत है, तो कहीं रज़ा की तसल्ली। हर सफ़्हे पर एक ऐसा एहसास है जो क़ारी के दिल से हमकलाम हो जाता है।
यह किताब उन रूहों के नाम है जो इश्क़ को महज़ एक रिश्ता नहीं, बल्कि रब तक पहुँचने का ज़रिया मानती हैं; जो हर दर्द में एक हिकमत, हर जुदाई में एक पैग़ाम और हर अश्क़ में उसकी रहमत तलाशती हैं।
अगर इन अल्फ़ाज़ में आपको अपने दिल की कोई दास्तान, अपनी रूह की कोई सदा या अपने रब का कोई इशारा महसूस हो, तो यही इस किताब की सबसे बड़ी कामयाबी होगी।
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