Description
पुस्तक का मूल उद्देश्य
यह पुस्तक विवाह एवं गृहस्थ जीवन को केवल एक कानूनी बंधन या सामाजिक रस्म न मानकर, उसे शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक – चारों स्तरों पर एक सशक्त एवं संतुलित संबंध के रूप में स्थापित करने हेतु लिखी गई है।
डॉ. पंकज कुमार ने इस पुस्तक में प्राचीन भारतीय जीवन-दर्शन (वैदिक आश्रम व्यवस्था) एवं आधुनिक मनोविज्ञान का समन्वय करते हुए गृहस्थ जीवन के हर पहलू को स्पर्श किया है।
लेखक-परिचय
डॉ. पंकज कुमार
डीन, इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय
प्राचार्य, इंजीनियरिंग विभाग
बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय, गढ़वा, झारखण्ड
डॉ. पंकज कुमार वर्तमान में बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय, गढ़वा (झारखण्ड) में इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय के डीन एवं इंजीनियरिंग विभाग के प्राचार्य हैं। वे विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग कार्यक्रमों (बी.टेक, डिप्लोमा इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, प्रबंधन) के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक नेतृत्व का दायित्व संभालते हैं।
प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ वे विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों एवं छात्र कल्याण कार्यक्रमों में सक्रिय योगदान देते हैं। उन्होंने रैगिंग-विरोधी सप्ताह एवं वृक्षारोपण अभियान जैसे कार्यक्रमों में भाग लिया है। उनका उद्देश्य छात्रों को तकनीकी दक्षता, नवाचार, अनुसंधान एवं नैतिक मूल्यों से युक्त बनाना है।
डॉ. पंकज कुमार की यह पुस्तक "गृहस्थ आश्रम में जीवित रहने के 100 उपाय" पारिवारिक जीवन की जटिलताओं के बीच संतुलन और सफलता पाने के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका है। इसमें उन्होंने प्राचीन भारतीय जीवन-दर्शन को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया है, जिससे पाठक अपने दैनिक जीवन में इन उपायों को सरलता से अपना सकें।
Publisher: Dr. Pankaj Kumar
Number of Pages: 39
Dimensions: A5
Interior Pages: B&W
Binding:
Paperback (Saddle Stitched)
Availability:
In Stock (Print on Demand)