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Mhaaree Maatee, Mhaare Aakhar

Hariyanvi Laghukatha Sanklan
Dr. Satywan Saurabh, Dr. Priyanka Saurabh, Dr. Ramniwas Manav
Type: Print Book
Genre: Reference, Architecture
Language: Hindi
Price: ₹275 + shipping
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Description

लघु कथा साहित्य की वो विधा सै, जो ज़िंदगी के किसी एक पल, घटना या भाव नै बहुत ही कम शब्दां में, पर गहरी और असरदार ढंग तै पेश करे सै। इस विधा में शब्दां की किफ़ायत अर भावां की गहराई का गजब का मेल मिलै सै।

लघु कथा की खासियत इसी बात में सै कि यो थोड़े सै शब्दां में भी पाठक के मन पै गहरी छाप छोड़ दे सै। लघु कथा सिर्फ घटनां का बयान कोनी करे, बल्कि उन घटनां के पीछे छुपे जज़्बात, सोच अर इंसानी मनोविज्ञान नै भी उजागर करे सै।
इस किताब में शामिल लघु कथाएँ ज़िंदगी के कई रंग अर तजुर्ब्यां का सजीव चित्र पेश करें सैं। कहीं बचपन की मासूमियत सै, कहीं जवानी के सपन्यां की उड़ान सै। कहीं रिश्त्यां की मिठास सै, तो कहीं बिछड़ण की कसक सै। कहीं संघर्ष की आँच सै, तो कहीं उम्मीद की ठंडी छाँह सै।

हर कहानी अपने आप में एक भावनात्मक दुनिया समेटे सै, जो पाठक नै सिर्फ पढ़ण खातर ही कोनी, बल्कि महसूस करण खातर भी बुलावे सै। इन कथां की भाषा सादी, सहज अर बहती हुई सै, ताकि हर किस्म का पाठक इनतै जुड़ सै। कथां की बनावट ऐसी सै कि शुरू तै ही पाठक नै बाँध ले अर आख़िर तक उसकी जिज्ञासा बनाए राखे। कुछ कहानियाँ चौंकावें सैं, कुछ दिल नै भीतर तै छू जावें सैं, अर कुछ ऐसी सोच छोड़ जावें सैं जिनका जवाब पाठक नै खुद खोजणा पड़े सै।

किसी भी अच्छी किताब या संग्रह का मकसद सिर्फ मनोरंजन कोनी होया करे, बल्कि पाठक के भीतर संवेदनशीलता अर सोच-विचार नै जाग्रत करणा भी होया करे। इन कथां नै पढ़ते हुए पाठक अपने आस-पास के माहौल नै नए नज़रिये तै देख पाएगा अर रिश्त्यां-नात्यां की बारीकियाँ अर ज़िंदगी के छोटे-छोटे पलां में छुपी खूबसूरती नै और गहराई तै महसूस करेगा। लघु कथा की दुनिया में घुसणा ऐसा सै जैसे कोई आदमी एक ऐसे बग़ीचे में कदम धर दे, जहाँ हर फूल अलग रंग अर अलग खुशबू लिए खिला हो। कुछ फूल तो तुरंत मन मोह लें सैं, अर कुछ की खुशबू धीरे-धीरे आत्मा में उतर जाया करे। इस संग्रह की हर कहानी भी ऐसे ही किसी फूल की तरह सै, जो अपने सही वक्त पै खिल कै पाठक के मन नै महका दे सै।

आशा सै कि यो किताब सुधी पाठकां नै ना सिर्फ आनंद देगी, बल्कि उनके मन अर सोच नै समृद्ध करकै लघु कथा की उस अनोखी दुनिया में ले जाएगी, जहाँ हर शब्द का अपना मोल सै अर हर अंत एक नई शुरुआत का इशारा करे सै।
इस रचनात्मक उद्यम खातर डॉ सत्यवान ‘सौरभ’ अर डॉ प्रियंका ‘सौरभ’ पूरे आदर अर साधुवाद के हकदार सैं।

— सुरेंद्र बांसल
रचनकार, संपादक, अनुवादक अर आर्ट विज़ुअलाइज़र
चंडीगढ़।

About the Authors

डॉ. सत्यवान ‘सौरभ’ समकालीन हिंदी साहित्य के एक सक्रिय और बहुआयामी रचनाकार हैं, जो कविता, दोहा, लघुकथा, बाल साहित्य और निबंध जैसी विविध विधाओं में सशक्त लेखन करते हैं। वे हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में समान दक्षता के साथ अभिव्यक्ति करते हैं। वर्ष 1989 में जन्मे डॉ. सौरभ ने राजनीति विज्ञान में डॉक्टरेट उपाधि प्राप्त की है तथा पशु चिकित्सा, उर्दू और पत्रकारिता में भी अध्ययन किया है। वर्तमान में वे हरियाणा सरकार में वेटरनरी इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं और शिक्षण से भी जुड़े हुए हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में “यादें”, “तितली है ख़ामोश”, “कहता है कुरुक्षेत्र”, “दरपण में दरार” और “चुप्पियों की महक” शामिल हैं। बाल साहित्य में “काग़ज़ की नाव” और “चलो कहानी सुनें” उल्लेखनीय हैं, जबकि “कुदरत की पीर” तथा Issues and Pains उनके चर्चित निबंध संग्रह हैं। डॉ. सौरभ की रचनाएँ देश-विदेश की 10,000 से अधिक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं तथा आकाशवाणी और दूरदर्शन से प्रसारित भी हुई हैं। उन्हें अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। वे पिछले दो दशकों से सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

डॉ. प्रियंका 'सौरभ' हिन्दी और अंग्रेज़ी—दोनों भाषाओं में समान दक्षता के साथ लेखन करने वाली प्रतिष्ठित लेखिका हैं। अब तक उनके 10, 000 से अधिक संपादकीय, लेख और विचार-आलेख देश-विदेश के प्रमुख समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी लेखनी सामाजिक चेतना, स्त्री-संवेदना, ग्रामीण यथार्थ और मानवीय रिश्तों की गहराई को मार्मिकता से अभिव्यक्त करती है। डॉ. प्रियंका सौरभ का साहित्यिक संसार विषय-विविधता और संवेदनात्मक गहराई का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है। उनके काव्य संग्रहों में “दीमक लगे गुलाब” खोखले होते रिश्तों और संवेदनहीन समाज पर तीखा प्रहार करता है, जबकि “चूल्हे से चाँद तक” स्त्री-अनुभवों, सीमाओं और आकांक्षाओं की रचनात्मक पड़ताल करता है। “मौन की मुस्कान” चुप्पियों में छिपी व्यथाओं और मुस्कानों के भीतर की चीख को सजीवता से उभारता है।

बच्चों के लिए लिखे गए बाल काव्य संग्रह “परियों से संवाद” में कल्पनाओं की उड़ान है, तो “बच्चों की दुनिया” बालमन की मासूम भावनाओं, प्रकृति-प्रेम और नैतिक मूल्यों से ओतप्रोत है। उनके हिन्दी निबंध संग्रह “समय की रेत पर” में सामाजिक बदलाव, स्त्री-विमर्श और समकालीन मुद्दों पर विचारोत्तेजक लेखन मिलता है, जबकि “निर्भयें” साहस, संघर्ष और आत्मसम्मान से जुड़ी विविध स्त्री कथाओं का सशक्त दस्तावेज है। अंग्रेज़ी में रचित निबंध संग्रह “Fearless” भारतीय स्त्री-जीवन, ग्रामीण संदर्भ और आंतरिक शक्ति की प्रभावशाली व्याख्या प्रस्तुत करता है। अंत में, लघुकथा संग्रह “आँचल की चुप्पी” स्त्री-मन के अनकहे संवादों और सूक्ष्म विद्रोहों को मार्मिक रूप से सामने लाता है।

Book Details

ISBN: 9788199864443
Publisher: प्रज्ञानशाला, आर.के. फीचर्स, प्रकाशक (पंजी.) भिवानी (हरियाणा), भारत
Number of Pages: 121
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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