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एक अकेली यात्री की दस यात्राएँ: रेत, झीलें, पहाड़, समंदर और घाट: पन्नों पर पूरा भारत (eBook)

रेत, झीलें, पहाड़, समंदर और घाट: पन्नों पर पूरा भारत
Type: e-book
Genre: Literature & Fiction, Travel
Language: Hindi
Price: ₹299
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF, EPUB

Description

एक शाम, एक तस्वीर, और पहली बार अकेले निकल पड़ने का फ़ैसला।

नवंबर की एक शाम। बालकनी में चाय का कप लिए बैठी एक लड़की के फ़ोन पर जैसलमेर के रेत के टीलों की एक तस्वीर आती है। मन पूछता है, "चलें?" दिमाग़ कहता है, "किसके साथ?" और फिर वो तय करती है: अकेले।

यहीं से शुरू होता है एक साल का सफ़र: दस यात्राएँ, दस जगहें, और एक मन जो हर बार थोड़ा और खुलता जाता है।

• जैसलमेर: रेत के टीले, ऊँट, हवेलियाँ और तारों भरी रात
• उदयपुर: झीलें, महल और कुंभलगढ़ की लंबी दीवार
• ऋषिकेश: गंगा की लहरों पर राफ्टिंग, योग और गंगा आरती
• बीर-बिलिंग: बादलों के साथ पैराग्लाइडिंग, मठ और चाय बागान
• लद्दाख: बुलेट पर ऊँचे दर्रे और नीली झीलें
• केरल: बैकवॉटर, चाय के पहाड़ और कथकली
• कूर्ग: कॉफ़ी की ख़ुशबू, धुंध, झरने और हाथी
• अंडमान: समुद्र तट और पानी के नीचे की दुनिया
• कच्छ: पूर्णिमा की चाँदनी में सफ़ेद रण
• वाराणसी: घाट, सुबह की नाव और बनारसी स्वाद

यह किताब न यात्रा-पुस्तिका है, न उपन्यास; यह दोनों के बीच की कोई चीज़ है। हर यात्रा घर से, एक ख़याल से शुरू होती है: प्लान बनता है, टिकट कटता है, बैग भरता है। फिर रास्ता, लोग, खाना, बाज़ार, रोमांच और ख़ामोशियाँ। और फिर घर लौटना, और खिड़की पर एक और याद रखना।

हर यात्रा के शुरू में एक छोटा-सा ख़ाका भी है: कब जाएँ, कैसे जाएँ, कहाँ रुकें। ताकि अगर किसी दिन आपका भी मन करे, तो आप भी बैग उठा लें।

उनके लिए जो अकेले घूमने का सपना देखते हैं, जो पहली सोलो ट्रिप की हिम्मत जुटा रहे हैं, और उनके लिए भी जो बस घर बैठे, एक कप चाय के साथ, पूरा भारत घूमना चाहते हैं।

चलिए, घर बैठे चलें।

About the Author

अज्ञात एक कलम-नाम है। इसके पीछे एक ऐसा मन है जो सफ़र को सिर्फ़ जगहें देखने का नाम नहीं, ख़ुद से मिलने का बहाना मानता है। जो चाय के कप के साथ खिड़की पर बैठकर भी दूर-दराज़ की यात्राएँ कर लेता है, और फिर उन्हें पन्नों पर उतार देता है, ताकि पढ़ने वाले भी घर बैठे साथ चल सकें।

"एक अकेली यात्री की दस यात्राएँ" अज्ञात की पहली किताब है।

Book Details

Publisher: Self-published
Number of Pages: 187
Availability: Available for Download (e-book)

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एक अकेली यात्री की दस यात्राएँ: रेत, झीलें, पहाड़, समंदर और घाट: पन्नों पर पूरा भारत

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