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सदियों से हमारे भारत देश को सोने की चिड़िया कहा जाता रहा है और न जाने इस भारत देश में कितनी धरोहर सामने आयी है और उन्हीं धरोहरों में से एक धरोहर जिसे भारत से लूटकर विदेश लंदन लेकर जाया गया हम उस धरोहर को कोहिनूर हीरा भी कहते हैं कोहिनूर एक मात्र हीरा ही नहीं बल्कि यह राजाओं का अहंकार और खून से लिखा इतिहास है यह कोहिनूर राजपूत राजाओं से लेकर मुगल शासक और सिख साम्राज्य के पास रहा और अंत में यहां ब्रिटिश शासको के पास चला गया ब्रिटिश शासन ने इसे भारत से विदेश लंदन पहुंचा दिया।
कोहिनूर की शुरुआत - हीरा गोलकुंडा की खादान में मजदूरों द्वारा खुदाई करते समय कोहिनूर हीरा निकाला गया था कोहिनूर हीरा मजदूरो द्वारा काकातीय वंश के राजा को सौप दिया राजा ने वह कोहिनूर हीरा अपनी कुलदेवी की मूर्ति की आंख में लगवाया था
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