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क्या प्रेम पाप है? (eBook)

प्रेम, विवाह, समाज, धर्म और उन रिश्तों की पड़ताल जिन्हें दुनिया स्वीकार नहीं करती
Type: e-book
Genre: Self-Improvement, Philosophy
Language: Hindi
Price: ₹199
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

क्या प्रेम पाप है? — पुस्तक विवरण क्या प्रेम सचमुच पाप है? प्रेम इंसान की सबसे स्वाभाविक भावनाओं में से एक है। फिर वही प्रेम कभी पवित्र कहलाता है, कभी अपराध, कभी त्याग और कभी सामाजिक कलंक। आखिर यह फैसला कौन करता है कि कौन-सा प्रेम सही है और कौन-सा गलत? “क्या प्रेम पाप है?” केवल प्रेम की कहानी नहीं, बल्कि उन सवालों की पड़ताल है जिनसे हम अक्सर बचते हैं। यह पुस्तक प्रेम, विवाह, परिवार, समाज, धर्म, कानून और नैतिकता के बीच मौजूद उस जटिल संघर्ष को समझने का प्रयास करती है, जहाँ एक व्यक्ति की भावनाएँ दूसरी ओर समाज के बनाए नियमों से टकराती हैं।

क्या विवाह ही प्रेम की अंतिम मंज़िल है? क्या विवाह के बाहर का हर रिश्ता अनैतिक है? क्या समाज द्वारा अस्वीकार किया गया प्रेम वास्तव में गलत होता है? क्या धर्म प्रेम को स्वीकार करता है या उसकी सीमाएँ निर्धारित करता है? क्या कानून और नैतिकता हमेशा एक ही दिशा में चलते हैं? और क्या किसी व्यक्ति को अपने जीवनसाथी या प्रेम का चुनाव करने के लिए समाज की स्वीकृति आवश्यक है?

यह पुस्तक किसी रिश्ते को बिना समझे सही या गलत घोषित नहीं करती। इसके बजाय यह उन परिस्थितियों, भावनाओं, सामाजिक दबावों और नैतिक प्रश्नों को सामने रखती है जो किसी रिश्ते को जन्म देते हैं और फिर उसी रिश्ते को कटघरे में खड़ा कर देते हैं। यहाँ प्रेम केवल दो लोगों के बीच की भावना नहीं है। यह व्यक्ति की स्वतंत्रता, परिवार की अपेक्षाओं, सामाजिक प्रतिष्ठा, धार्मिक मान्यताओं, कानूनी अधिकारों और नैतिक सीमाओं से जुड़ा प्रश्न बन जाता है।

कुछ रिश्ते समाज को स्वीकार्य होते हैं, कुछ कानून को; कुछ कानूनन वैध होते हुए भी सामाजिक रूप से निंदनीय माने जाते हैं। और कुछ ऐसे भी होते हैं जहाँ व्यक्ति स्वयं अपने मन, कर्तव्य और इच्छा के बीच फँस जाता है। “क्या प्रेम पाप है?” आपको कोई आसान उत्तर देने का दावा नहीं करती।

यह आपको उन सवालों के सामने खड़ा करती है जिनका उत्तर शायद आपकी अपनी सोच, आपके अनुभव और आपकी नैतिक समझ में छिपा है। क्योंकि असली सवाल शायद यह नहीं है कि— “प्रेम सही है या गलत?” बल्कि यह है— “सही और गलत तय करने का अधिकार आखिर किसके पास है?” एक ऐसी किताब जो आपको प्रेम के बारे में नहीं, बल्कि अपनी सोच के बारे में सोचने पर मजबूर करेगी।

About the Author

अनुराग अग्रवाल लेखक, व्यवसायी, विचारक और सामाजिक सरोकारों से जुड़े व्यक्तित्व हैं। उनकी लेखनी का केंद्र मानव जीवन, सोच, व्यवहार, रिश्ते और समाज की उन सच्चाइयों को समझना है, जिन पर अक्सर खुलकर बात नहीं की जाती। उनकी लेखन शैली सीधी, स्पष्ट और प्रश्न खड़े करने वाली है।

वे पाठक को तैयार निष्कर्ष देने के बजाय उसे स्वयं सोचने, अपनी धारणाओं पर सवाल उठाने और परिस्थितियों को एक अलग दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी पुस्तक “क्या प्रेम पाप है?” प्रेम और रिश्तों को केवल भावनात्मक दृष्टि से नहीं, बल्कि विवाह, परिवार, समाज, धर्म, कानून और नैतिकता के व्यापक संदर्भ में देखने का प्रयास है।

अनुराग अग्रवाल का मानना है कि हर वह सवाल जिसका उत्तर समाज ने पहले से तय कर दिया है, उसे एक बार फिर तर्क, संवेदना और मानवीय दृष्टि से देखना चाहिए।

Book Details

ISBN: 9789334491739
Publisher: अनुराग अग्रवाल
Number of Pages: 228
Availability: Available for Download (e-book)

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