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क्या है माँ का आँचल? सिर्फ एक कपड़ा, या एक पूरी दुनिया?
"आँचल की छाँव" उन अनकही, अनछूयी भावनाओं का संग्रह है जो हर माँ अपने दिल में समेटे रखती है। इस पुस्तक की हर कविता माँ के जीवन के अलग-अलग रंग दर्शाती है - कभी ममता की शीतल छाँव, कभी त्याग की तपती धूप, तो कभी संघर्ष की आँधी।
ये कविताएँ माँ के हर रूप को छूती हैं - चाहे वो घर की लक्ष्मी हो, तवायफ़ हो, या विलक्षण नारी हो। इतिहास की सिंगल मदर भी है, जो माता-पिता दोनों बनकर अपने बच्चों को पालती है। इतिहास गवाह है - शकुंतला हो या माता सीता, सिंगल मदर का रूप सदियों से नारी शक्ति का प्रतीक रहा है।
सुमित्रा गुप्ता 'सखी' की कलम से निकली ये रचनाएँ हर उस इंसान के दिल को छू लेंगी, जिसने माँ के प्यार को महसूस किया है। ये सिर्फ कविताएँ नहीं, माँ के दिल की धड़कनें हैं। संतानों के इंतजार में नरकंकाल बन चुके माता-पिता की भी करूणा गाथा बताती है।
अगर आप माँ को समझना चाहते हैं, या माँ के हर रूप के एहसास को जीना चाहते हैं, तो ये किताब आपके लिए है। क्योंकि यदि माँ ना होती, तो ये सृष्टि भी ना होती,ये अकाट्य सत्य है।
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