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क्या आपको याद है वो दौर, जब किसी का एक छोटा-सा खत पूरे दिन चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए काफी होता था? जब लैंडलाइन की घंटी बजते ही दिल की धड़कन तेज हो जाती थी और फोन उठाने के लिए घर के किसी सदस्य से पहले पहुँचने की कोशिश होती थी?
यह वो समय था जब प्यार में इंटरनेट की जरूरत नहीं थी। एक झलक, हल्की-सी मुस्कान, स्कूल या कॉलेज में अचानक हुई मुलाकात और दोस्तों के जरिए पहुँचाया गया एक छोटा-सा संदेश ही दिल में हजारों ख्वाब जगा देता था।
90s का प्यार आपको उसी खूबसूरत दौर में वापस ले जाने की एक कोशिश है—जहाँ इंतजार लंबा था, मुलाकातें कम थीं, लेकिन भावनाएँ सच्ची और यादें बेहद गहरी महसूस होती थीं।
इस किताब में आपको पहली मोहब्बत की झिझक, चुपके-चुपके किसी को देखना, प्रेम-पत्र लिखने की हिम्मत जुटाना, घरवालों से बातें छिपाना, दोस्तों की मदद लेना और उस खास इंसान से बात करने के लिए बहाने ढूँढ़ना जैसे अनुभवों की झलक मिलेगी।
यह सिर्फ प्यार की कहानी नहीं, बल्कि उस दौर की याद भी है जब मोबाइल हर हाथ में नहीं था, सोशल मीडिया नहीं था और किसी के जवाब का इंतजार भी मोहब्बत का एक हिस्सा हुआ करता था।
अगर आपने 90 का दशक देखा है, तो हो सकता है इस किताब का कोई पन्ना आपको अपने पहले प्यार की याद दिला दे। और अगर आप आज की नई पीढ़ी से हैं, तो आपको समझने का मौका मिलेगा कि तकनीक से दूर उस समय में लोग अपने दिल की बातें कैसे कहते थे।
कुछ लोग जिंदगी से दूर हो जाते हैं, लेकिन उनकी यादें कभी पुरानी नहीं होतीं।
आइए, लौट चलें उस दौर में जहाँ मोहब्बत कम दिखाई जाती थी, मगर दिल में बहुत गहराई से महसूस की जाती थी।
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