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ख़ामोश कमरे (eBook)

सन्नाटे, अनकही उम्मीदें और कंधों पर तैरती हुई ज़िम्मेदारियाँ
Type: e-book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹99
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

"सन्नाटे, अनकही उम्मीदें और कंधों पर तैरती हुई ज़िम्मेदारियाँ..."

'ख़ामोश कमरे' सिर्फ़ पन्नों पर दर्ज नज़्में नहीं, बल्कि उन अनकहे जज़्बातों का जीवंत दस्तावेज़ है, जिनसे हर संघर्षशील युवा गुज़रता है। जब आँखों में बड़े सपने हों, दिल में अपनों की फ़िक्र और कंधों पर भविष्य का बोझ, तब बंद कमरे की चारदीवारियाँ ही इंसान की सबसे बड़ी हमराज़ बनती हैं।

यह काव्य-संग्रह जीवन के चार गहरे अनुभवों से होकर गुज़रता है:

भाग १ : दीवारों का बोझ — अकेलेपन की चुभन, प्रतियोगिता का दबाव और अपनी ही उम्मीदों से जूझता मन।

भाग २ : अनकहे रिश्ते और ठंडी चाय — माँ-बाप का मूक त्याग, परिवार के प्रति समर्पण और न कही जा सकने वाली बातें।

भाग ३ : आधी रात की छत — तारों के नीचे टहलती चिंताएँ, भविष्य का डर और भीतर का सन्नाटा।

भाग ४ : खिड़की से आती धूप — तमाम निराशाओं और अंधेरों के बीच हौसला, आत्म-विश्वास और एक नई सुबह का उजास।

अगर आपने भी कभी रात के सन्नाटे में छत को ताकते हुए अपने कल को तलाशा है, या ठंडी चाय की घूंट के साथ ज़िम्मेदारियों को जिया है, तो यह किताब आपकी अपनी ख़ामोशी को आवाज़ देगी।

About the Author

कृष्णकांत धाकड़ समकालीन हिंदी कविता के संवेदनशील युवा हस्ताक्षर हैं। उनकी रचनाओं में युवा मन के द्वंद्व, घर-परिवार की ज़िम्मेदारियाँ, संघर्ष और मध्यमवर्गीय जीवन के अनकहे पलों का गहरा यथार्थ झलकता है। वे अपनी सहज भाषा और मार्मिक अभिव्यक्ति के माध्यम से आम इंसान के उन एहसासों को स्वर देते हैं, जो अक्सर रोज़मर्रा की आपाधापी में अनकहे रह जाते हैं। 'ख़ामोश कमरे' उनका ऐसा काव्य-संग्रह है, जो सपनों, सन्नाटों और संघर्ष के बीच संतुलन तलाशते हर युवा की भीतरी दास्तान बयान करता है।

Book Details

Publisher: Krishnkant dhakar
Number of Pages: 159
Availability: Available for Download (e-book)

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