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अमृतबिन्दु उपनिषद् (eBook)

अमरत्व की बूँद
Type: e-book
Genre: Philosophy, Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹50
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF, EPUB

Description

यदि हमारा मन—जो हमारी बेचैनी, इच्छाओं, भय और भटकाव का स्रोत है—मुक्ति का द्वार भी बन सके, तो क्या होगा?

अमृतबिन्दु उपनिषद् इस प्रश्न का संक्षिप्त, किन्तु अत्यन्त गहन विवेचन प्रस्तुत करता है। यह सिखाता है कि वस्तुओं और इच्छाओं से आसक्त होकर मन बन्धन में पड़ जाता है; पर जब वही मन शान्त, निर्मल और स्वतन्त्र होता है, तब वह मुक्ति का अनुभव करता है। ध्यान, विवेक और निरन्तर आत्म-अन्वेषण के माध्यम से साधक को परिवर्तनशील रूपों से परे आत्मा के शाश्वत प्रकाश की ओर ले जाया जाता है।

यह सचित्र पुस्तक अमृतबिन्दु उपनिषद् के ज्ञान को एक भावपूर्ण दृश्य-यात्रा के माध्यम से जीवन्त बनाती है। एक युवा साधक बार-बार दिखाई देने वाली स्वर्णिम बूँद—‘अमरत्व की बूँद’—का अनुसरण करता है। यह बूँद कभी शान्त जल में, कभी हृदय में, कभी आकाश में, कभी जीव-जगत में और कभी दैनिक जीवन के साधारण कार्यों में दिखाई देती है। मिट्टी के घड़े और खुला आकाश पृथकता के भ्रम को उजागर करते हैं। अनेक रंगों की गायों से प्राप्त एक-सा दूध उस एक अन्तर्निहित सार की ओर संकेत करता है। अन्न का दाना भूसी से अलग होता है, मन्थन से मक्खन प्रकट होता है और धैर्यपूर्ण घर्षण से अग्नि उत्पन्न होती है। प्रत्येक चित्र एक प्राचीन शिक्षा को ऐसे अनुभव में रूपान्तरित करता है, जिसे देखा, अनुभव किया और मनन में उतारा जा सके।

यह यात्रा धीरे-धीरे उपनिषदों के कालातीत संसार से आधुनिक युग में प्रवेश करती है। फोन की सूचनाएँ, विज्ञापन, स्क्रीन और गतिशील भीड़ यह दर्शाते हैं कि बाहर की ओर खिंचता हुआ मन आज भी मनुष्य की एक प्रमुख चुनौती है। फिर भी पुस्तक प्रौद्योगिकी की निन्दा नहीं करती। इसके स्थान पर यह पाठकों को ठहरने, इच्छा को बिना किसी निर्णय या दोषारोपण के देखने और सजग ध्यान की शान्त स्वतन्त्रता को पुनः खोजने के लिए आमन्त्रित करती है।

सरल और सहज भाषा में लिखी गई तथा प्रकाशमय चित्रों से समृद्ध यह पुस्तक सभी आयु-वर्गों के पाठकों के लिए है। युवा पाठक विस्मय, खोज और आन्तरिक शान्ति से भरी इसकी दृश्य-कथा का अनुसरण कर सकते हैं, जबकि वयस्कों को इसके पृष्ठों में आत्मचिन्तन और ध्यान का निमन्त्रण मिल सकता है। यह पुस्तक पाठक से संसार का त्याग करने के लिए नहीं कहती; वह उसे प्रत्येक अनुभव में उपस्थित अपरिवर्तनशील चेतना को पहचानने के लिए प्रेरित करती है।

मानव–एआई सहयोग से निर्मित यह पुस्तक मानवीय व्याख्या, कलात्मक निर्देशन और आध्यात्मिक चिन्तन को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की कल्पनाशील सम्भावनाओं से जोड़ती है। दोनों मिलकर भारत के कालातीत ज्ञान-ग्रन्थों में से एक को नवीन, सहज और सुबोध रूप में प्रस्तुत करते हैं।
अमृतबिन्दु उपनिषद्: अमरत्व की बूँद मन, मुक्ति और आत्मा के प्रकाश पर आधारित एक सौम्य दृश्य-ध्यान है। यह पाठकों को अपने भीतर देखने, निरन्तर परिवर्तन के बीच अचल रहने वाले सत्य को खोजने और समस्त जीवन में मौन रूप से विद्यमान एकता को पहचानने के लिए आमन्त्रित करता है।

About the Author

डॉ. पार्थ मजूमदार एक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, शोधकर्ता, शिक्षाविद् और लेखक हैं। उनके पास वैश्विक निगमों, उद्यमशील उपक्रमों, सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजनाओं और उभरती प्रौद्योगिकियों में तीन दशकों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने डेटा विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है और वर्तमान में कंप्यूटर विज्ञान तथा भारतीय ज्ञान परम्परा—दोनों क्षेत्रों में डॉक्टरेट अनुसंधान कर रहे हैं।

सीमेंस, एनआईआईटी, एमडॉक्स, मोबिली और जेपीमॉर्गन चेस में वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिकाओं तथा मजूमदार कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के प्रबन्ध निदेशक के रूप में उन्होंने बड़े स्तर के प्रौद्योगिकी मंचों की रूपरेखा तैयार की और उन्हें सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया है। उन्होंने एशिया, मध्य पूर्व, यूरोप, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में सरकारों, वित्तीय संस्थानों तथा दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को परामर्श भी दिया है।

आईईईई के सीनियर सदस्य तथा लगभग १०० पुस्तकों और ३० से अधिक शोध-पत्रों के लेखक डॉ. मजूमदार औद्योगिक अनुभव को अकादमिक विद्वत्ता से जोड़ते हैं। उनकी विशेषज्ञता में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, सॉफ्टवेयर अभियांत्रिकी, डेटा विज्ञान और भारतीय ज्ञान परम्परा सम्मिलित हैं। उनका कार्य नवाचार, अन्तर्विषयी अनुसंधान और समाज के कल्याण के लिए ज्ञान के व्यावहारिक उपयोग के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता से प्रेरित है।

Book Details

Publisher: Dr Partha Majumdar
Number of Pages: 35
Availability: Available for Download (e-book)

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