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तैत्तिरीय उपनिषद् (eBook)

अन्नमय से आनन्दमय तक की आध्यात्मिक यात्रा
Type: e-book
Genre: Philosophy, Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹50
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF, EPUB

Description

तैत्तिरीय उपनिषद् भारतीय ज्ञान परम्परा के सबसे महत्त्वपूर्ण उपनिषदों में से एक है। यह मनुष्य को केवल एक भौतिक शरीर के रूप में नहीं, बल्कि अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनन्दमय—इन पाँच कोशों से युक्त एक बहुआयामी अस्तित्व के रूप में प्रस्तुत करता है। गुरु और शिष्य के संवाद, गहन आत्मचिन्तन तथा भृगु के सत्य-अन्वेषण के माध्यम से यह उपनिषद् पाठक को बाह्य जगत से आन्तरिक आनन्द और आत्मसाक्षात्कार की ओर अग्रसर करता है।

यह चित्र-पुस्तक तैत्तिरीय उपनिषद् की गूढ़ शिक्षाओं को सरल, सहज और आकर्षक रूप में प्रस्तुत करती है। प्रत्येक पृष्ठ पर सुन्दर चित्रों के साथ संक्षिप्त हिन्दी पाठ दिया गया है, जिससे बालक, युवा और वयस्क सभी पाठक उपनिषद् के मूल विचारों को सहजता से समझ सकें। पुस्तक में ज्ञान, अनुशासन, सत्य, ब्रह्म, पञ्चकोश, आत्म-अन्वेषण और आन्तरिक आनन्द जैसी अवधारणाओं को प्रेरक दृश्य कथाओं के माध्यम से जीवंत बनाया गया है।

यह पुस्तक केवल प्राचीन दर्शन का परिचय नहीं कराती, बल्कि आधुनिक जीवन के सन्दर्भ में भी तैत्तिरीय उपनिषद् की प्रासंगिकता को उजागर करती है। तीव्र गति, निरन्तर विचलनों और सूचना-प्रधान युग में यह हमें स्मरण कराती है कि वास्तविक सुख, शान्ति और ज्ञान बाहर नहीं, बल्कि हमारे अपने भीतर विद्यमान हैं। यह पुस्तक पाठकों को आत्मचिन्तन, आन्तरिक विकास और शाश्वत भारतीय ज्ञान परम्परा से जुड़ने के लिए प्रेरित करती है।

About the Author

डॉ. पार्थ मजुमदार एक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, रणनीतिकार और लेखक हैं, जिन्हें वैश्विक निगमों, उद्यमशील उपक्रमों तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने कंप्यूटर विज्ञान, व्यवसाय प्रशासन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा तथा भारतीय ज्ञान परंपरा में उच्च स्तरीय शैक्षणिक योग्यताएँ अर्जित की हैं।

सीमेंस, मोबिली, जेपी मॉर्गन चेस जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में नेतृत्वकारी भूमिकाएँ निभाने के साथ-साथ मजुमदार कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी प्रणालियों के विकास का नेतृत्व किया है। उन्होंने एशिया, मध्य-पूर्व और यूरोप के विभिन्न देशों में सरकारों तथा दूरसंचार क्षेत्र की अग्रणी संस्थाओं को रणनीतिक परामर्श भी प्रदान किया है।

८५ से अधिक पुस्तकों और २५ से अधिक शोध-पत्रों के लेखक डॉ. मजुमदार उद्योग और अकादमिक जगत के अनुभवों का अद्वितीय समन्वय प्रस्तुत करते हैं। उनकी विशेषज्ञता डेटा विज्ञान, परियोजना प्रबंधन तथा नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रतिष्ठित है। उनका कार्य नवाचार, सांस्कृतिक प्रज्ञा और सतत विकास पर आधारित नेतृत्व की एक ऐसी दृष्टि को प्रतिबिंबित करता है, जो आधुनिक प्रौद्योगिकी को मानवीय मूल्यों और ज्ञान परंपराओं के साथ जोड़ती है।

Book Details

Publisher: Dr Partha Majumdar
Number of Pages: 35
Availability: Available for Download (e-book)

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तैत्तिरीय उपनिषद्

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