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इख़्तियार-ए-बरबादी
लेखिका: तनिष्का
कुछ मोहब्बतें मुकम्मल नहीं होतीं, वो बस इंसान को मुकम्मल कर जाती हैं,
और कुछ फैसले ऐसे होते हैं, जो लिए नहीं जाते, बल्कि महसूस किए जाते हैं।
इख़्तियार-ए-बरबादी उन जज़्बातों का सफ़र है, जहाँ इश्क़ सिर्फ़ पाया नहीं जाता, जिया जाता है, सहा जाता है, और कभी-कभी, ख़ुद अपनी ही तबाही चुनकर निभाया जाता है।
इन पन्नों में बसी हर नज़्म एक कहानी है, इंतज़ार की, टूटने की, चाहत की, और उस ख़ामोशी की, जो अल्फ़ाज़ से ज़्यादा बोलती है। ये किताब उन रूहों के लिए है, जिन्होंने किसी को इस क़दर चाहा हो कि ख़ुद को खो दिया हो, और फिर उसी खोने में एक अजीब सा सुकून पा लिया हो।
ये सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, महसूस करने के लिए लिखी गई है।
अगर आपने कभी किसी की याद में रातों को जागकर खुद से सवाल किए हैं,
अगर आपने कभी मोहब्बत में हारकर भी उसे अपनी जीत माना है,
तो ये किताब आपकी ही कहानी है।
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