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सनातन अयोध्या' अयोध्या नगरी की उस लंबी सभ्यतागत और न्यायिक यात्रा का विस्तृत अध्ययन है, जो 1855 के हनुमानगढ़ी संघर्ष से आरंभ होकर 2019 के सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक रामजन्मभूमि निर्णय तक पहुँचती है। सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, इतिहासकार और शोधकर्ता नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने न्यायिक अभिलेखों, गजेटियरों, पुरातात्त्विक रिपोर्टों और वैष्णव बैरागी संत-परंपरा के गहन अध्ययन के आधार पर आस्था, इतिहास और कानून का संतुलित एवं प्रमाण-आधारित विवेचन प्रस्तुत किया है। इस ग्रंथ में महंत रघुबर दास का 1885 का मुकदमा, निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान वाद, ASI की पुरातात्त्विक खुदाई, इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय और 2024 में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा तक की संपूर्ण यात्रा को दस्तावेज़ों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।
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