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इतिहास नहीं बोलेगा... प्रमाण बोलेंगे!
"सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा" एक व्यापक, प्रमाण-आधारित ऐतिहासिक अध्ययन है, जो सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा की आध्यात्मिक और सभ्यतागत यात्रा को वैदिक युग से लेकर आधुनिक भारत तक विस्तार से प्रस्तुत करता है।
वेदों, उपनिषदों, पुराणों, रामायण, महाभारत, भगवद्गीता, पंचतंत्र, मनुस्मृति, प्राचीन शिलालेखों, ताम्रपत्रों, फारसी इतिहास-ग्रंथों, राजकीय अभिलेखों, गजेटियरों, प्रसिद्ध यात्रियों के विवरणों और आधुनिक इतिहासकारों के शोध — इन सभी प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर यह पुस्तक एक ऐसी परंपरा का सच्चा और सुव्यवस्थित विवरण प्रस्तुत करती है, जिसे मुख्यधारा के इतिहास में लंबे समय तक अनदेखा किया गया।
यह पुस्तक किसी समाज, धर्म या जाति के समर्थन में नहीं लिखी गई है। यह सत्य, आध्यात्मिक जड़ों और प्रामाणिक प्रमाणों को समर्पित एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अध्ययन है।
यह पुस्तक क्यों पढ़ें:
* उस अनकही आध्यात्मिक परंपरा को जानें जिसने भारत को गढ़ा
* शास्त्रों, शिलालेखों और अभिलेखों से प्रामाणिक संदर्भ
* वैष्णव बैरागियों की ऐतिहासिक पहचान को उजागर करती है
* शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और सत्य के जिज्ञासुओं के लिए अनिवार्य
प्रामाणिक प्रमाणों और ऐतिहासिक संदर्भों पर आधारित एक सत्य अध्ययन — 538 पृष्ठ, गहन शोध, प्रमाण-आधारित और ऐतिहासिक तथ्यों में निहित।
लेखक: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क — सेवानिवृत्त नायब सूबेदार, भारतीय सेना; इतिहासकार | शोधकर्ता | लेखक। बंदूक से कलम तक, राष्ट्रसेवा से इतिहास-संरक्षण तक।
"ज्ञान संपूर्ण संसार में सीमित नहीं है। यह केवल समर्पित लोगों तक सीमित है।"
आइए, हम अपने इतिहास, विरासत और शाश्वत मूल्यों को संरक्षित करें और फैलाएँ।
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