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“रंगांधता (Colour Vision Deficiency) का उपचार (eBook)

स्व-अध्ययन पाठ्यक्रम
Type: e-book
Genre: Self-Improvement
Language: Hindi
Price: ₹999
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

यह पुस्तक उन लोगों के लिए लिखी गई है जिन्हें आंशिक रंग-अंधता या रंग दृष्टि की कमी है और जो चिकित्सा परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए इशिहारा पुस्तक पढ़ नहीं पाते।
यह पुस्तक रंग-अंधता के लिए Brain Mapping System तकनीकों के आधार पर तैयार की गई है। रंग-अंधता से पीड़ित व्यक्ति रंगों की पहचान कर सकता है और पुलिस, सेना, वायु सेना, नौसेना, केमिस्ट, डॉक्टर, रेलवे, सशस्त्र बल, खनन, पुलिस अधिकारी आदि विभिन्न प्राधिकरणों द्वारा आयोजित चिकित्सा परीक्षाओं में सफल हो सकता है।
आपको कम-से-कम 21 दिनों तक प्रतिदिन 2–3 घंटे लाल प्लेटों और सामान्य प्लेटों के साथ अभ्यास करना है।
आप निश्चित रूप से मेडिकल परीक्षा उत्तीर्ण करेंगे और अवसर खोए बिना नौकरी प्राप्त करेंगे।
यह स्व-अध्ययन पुस्तक है और किसी अन्य प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं है।
— प्रो. एन. एल. श्रमण
प्रकाशक: द मेमोरी गुरु ऑफ इंडिया, कानपुर–208007, भारत

About the Author

द मेमोरी गुरु ऑफ इंडिया, जिन्हें विकिपीडिया के अनुसार विश्व के शीर्ष 20 स्मरणशास्त्रियों (Mnemonists) में बताया गया है, का जन्म 15 अप्रैल 1952 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले की तहसील मलिहाबाद के आम-हरित क्षेत्र में स्थित तेरवा नामक गाँव में हुआ। उनका जन्म और पालन-पोषण किसान परिवार में हुआ। उनका मूल नाम नंद लाल था।
10 वर्ष की आयु में उन्होंने अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू और संस्कृत सीखी। उनकी रुचि अपनी कक्षा की सभी पुस्तकों तथा हिंदू धर्म की प्रसिद्ध धार्मिक पुस्तकों—रामायण, महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता आदि—को सीखने और याद करने में थी। बचपन में उन्होंने हस्तरेखा विज्ञान और ज्योतिष सीखा और 'पंडित' के रूप में प्रसिद्ध हुए। ग्रामीण अपनी समस्याओं के समाधान और भविष्य जानने के लिए उनके पास आते थे। सहपाठी भी अपना भविष्य और करियर जानने के लिए उनसे संपर्क करते थे।
उन्हें गणित में बहुत रुचि थी और वे परीक्षाओं में हमेशा पूर्ण अंक प्राप्त करते थे। वे अपनी कक्षा में हमेशा प्रथम आते थे और उन्हें कई बार प्रमाणपत्र तथा पदक प्रदान किए गए। पाँचवीं कक्षा तक की प्राथमिक शिक्षा उन्होंने पास के कैथुलिया गाँव के प्राथमिक विद्यालय में पूरी की। आठवीं कक्षा उन्होंने रहीमाबाद से उत्तीर्ण की, जो साप्ताहिक बाजार और वाणिज्यिक केंद्र के लिए जाना जाता था और उनके निवास से लगभग दो किलोमीटर दूर था।
कक्षा 10 से 12 तक उन्होंने लखनऊ स्थित राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज में अध्ययन किया। उन्होंने चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर से स्नातक किया, जिसे लोकप्रिय रूप से 'पत्थर कॉलेज' कहा जाता था क्योंकि यह लाल पत्थरों से बनाया गया था। 1975 में उन्होंने जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग में मास्टर डिग्री में प्रवेश लिया। 1996 में उन्होंने विश्वविद्यालय छोड़कर एक भारतीय राष्ट्रीयकृत बैंक में अधिकारी के पद पर कार्यभार ग्रहण किया।
मेमोरी गुरु की हमेशा रुचि रही कि चीजों को याद करना आसान बनाया जाए। सूचना प्रौद्योगिकी के तेजी से विस्तार के दौर में छात्रों के साथ-साथ पेशेवरों को भी बहुत कुछ सीखना पड़ता था। इससे उन्हें ऐसी प्रणाली विकसित करने की प्रेरणा मिली जिससे बहुत कम समय में किसी भी चीज को लंबे समय तक याद किया जा सके।
उन्होंने भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए प्रणालियाँ बनाने हेतु स्मृति और मानसिक गणित पर दिन-रात काम किया। उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी में मानसिक स्मृति तथा मानसिक गणित पर बड़ी संख्या में पाठ लिखे और स्मृति विकास तथा मानसिक गणित पर अनेक पुस्तकें लिखीं। उनकी प्रसिद्ध हिंदी पुस्तक 'भूलना भूल जाओगे' है।
उन्हें Google Knol (अब Google द्वारा बंद पोर्टल) से सर्वश्रेष्ठ लेखक का पुरस्कार मिला। जीवन के बड़े हिस्से में स्मृति पर काम करने के कारण वे 'द मेमोरी गुरु ऑफ इंडिया' के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्हें 'श्रमण' भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने बुद्ध से सीखा। शिक्षक, प्रशिक्षक, अनुदेशक, कवि, प्रेरक और आविष्कारक होने के कारण लोग उन्हें प्रोफेसर एन. एल. श्रमण भी कहते हैं और उनका उपनाम 'द मेमोरी गुरु ऑफ इंडिया' है।

Book Details

Publisher: मेमोरी गुरु ऑफ इंडिया कानपुर
Number of Pages: 108
Availability: Available for Download (e-book)

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“रंगांधता (Colour Vision Deficiency) का उपचार

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