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मनुष्य का मन और आंतरिक ऑपरेटिंग सिस्टम
जीवन निर्माण श्रृंखला — पुस्तक 03 | पुस्तक क्रमांक 08
मनुष्य ने बाहरी संसार को समझने में बहुत प्रगति की है, लेकिन अपने मन, स्वभाव और व्यवहार को समझना अभी भी एक बड़ी चुनौती है। यह पुस्तक इसी आंतरिक संसार को सरल भाषा में समझने का प्रयास है।
हमारा स्वभाव कैसे बनता है? परिवार और समाज हमारे मन को कैसे प्रभावित करते हैं? विश्वास, भय, भावनाएँ और अनुभव हमारे निर्णयों को कैसे बदलते हैं? मन के भीतर बने मानसिक मदरबोर्ड, मानसिक ऐप्स, मानसिक फ़िल्टर और भ्रम तंत्र हमारे जीवन को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
पुस्तक इन प्रश्नों को केवल जानकारी के रूप में नहीं रखती, बल्कि पाठक को अपने जीवन और अपने विचारों को स्वयं देखने और समझने के लिए प्रेरित करती है।
इसमें मनुष्य के शरीर, मन, मानसिक संरचना, भावनात्मक ऊर्जा और क्रिया–प्रतिक्रिया के संबंध को भी एक समग्र दृष्टि से समझाया गया है। साथ ही समाज, परंपरा, विश्वास और बाहरी प्रभावों को विवेक के साथ देखने की आवश्यकता पर विचार किया गया है।
जीवन निर्माण श्रृंखला की यह पुस्तक व्यक्ति को बाहर की दुनिया बदलने से पहले अपने भीतर की व्यवस्था को समझने की दिशा में ले जाती है। इसका उद्देश्य किसी विश्वास को थोपना नहीं, बल्कि मनुष्य में समझ, जागरूकता, विवेक और आत्मचिंतन विकसित करना है।
एक सरल प्रश्न से शुरुआत करें—
क्या हम अपने मन को चला रहे हैं, या हमारा मन हमें चला रहा है?
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