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राष्ट्र निर्माण की शिक्षा क्रांति (eBook)

Type: e-book
Genre: Education & Language, Biographies & Memoirs
Language: English, Hindi
Price: ₹49
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

राष्ट्र निर्माण की शिक्षा क्रांति

शिक्षा केवल डिग्री नहीं, जीवन निर्माण है।

आज का संसार तेजी से बदल रहा है। डिजिटल तकनीक, इंटरनेट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल बैंकिंग और बदलती सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों ने आने वाली पीढ़ी के सामने नई संभावनाओं के साथ नई चुनौतियाँ भी खड़ी कर दी हैं। ऐसे समय में यह प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है कि हमारी शिक्षा बच्चों को केवल परीक्षा और डिग्री के लिए तैयार कर रही है या वास्तविक जीवन के लिए भी?

"राष्ट्र निर्माण की शिक्षा क्रांति" इसी प्रश्न पर गंभीरता से विचार करने का एक प्रयास है।

इस पुस्तक में शिक्षा को केवल विद्यालय और पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर गर्भ से प्रारम्भ होने वाली और जीवनभर चलने वाली विकास प्रक्रिया के रूप में देखा गया है। इसमें वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की कमियों, डिग्री और वास्तविक ज्ञान के अंतर, चरित्र निर्माण, जीवन कौशल, डिजिटल शिक्षा, कंप्यूटर एवं AI, वित्तीय और बैंकिंग जागरूकता, नागरिक अधिकार एवं कर्तव्य, उच्च शिक्षा, स्वरोजगार, उद्यमिता, ध्यान और आंतरिक विकास जैसे विषयों पर विचार किया गया है।

पुस्तक का मूल विचार है कि विद्यार्थी को केवल नौकरी पाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, जागरूक, चरित्रवान, कुशल और जिम्मेदार नागरिक बनाया जाना चाहिए।

एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है जिसमें बच्चा पढ़ना-लिखना और परीक्षा देना तो सीखे ही, साथ-साथ जीवन की वास्तविक परिस्थितियों का सामना करना भी सीखे—तकनीक का सही उपयोग, आर्थिक निर्णय, अपने अधिकार और कर्तव्य, समस्या का समाधान, संवाद, आत्मअनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी।

यह पुस्तक शिक्षा को बदलने की आवश्यकता पर केवल प्रश्न नहीं उठाती, बल्कि एक समग्र और भविष्य उन्मुख शिक्षा व्यवस्था का प्रारूप प्रस्तुत करने का प्रयास भी करती है।

क्योंकि—

जब शिक्षा बदलती है, तो व्यक्ति बदलता है।
व्यक्ति बदलता है, तो परिवार बदलता है।
परिवार बदलता है, तो समाज बदलता है।
और समाज बदलता है, तो राष्ट्र का भविष्य बदलता है।

About the Author

लेखक के बारे में

प्रेम शाक्य स्वतंत्र चिंतक, लेखक और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न पहलुओं पर निरंतर अध्ययन एवं लेखन करने वाले विचारक हैं। उनका मानना है कि किसी भी राष्ट्र का वास्तविक निर्माण केवल आर्थिक विकास, बड़ी इमारतों या आधुनिक तकनीक से नहीं होता, बल्कि उसके नागरिकों के विचार, चरित्र, परिवार, शिक्षा और सामाजिक चेतना से होता है।

लेखक का लेखन मनुष्य के जीवन को एक समग्र दृष्टि से समझने का प्रयास है। वे गर्भ संस्कार, चेतना, शिक्षा, परिवार, समाज, आत्मनिर्भरता, नैतिकता, आध्यात्मिक विकास तथा आधुनिक विज्ञान और तकनीक के संतुलित उपयोग जैसे विषयों को राष्ट्र निर्माण से जोड़कर देखते हैं।

उनका विशेष जोर इस बात पर है कि शिक्षा केवल डिग्री या रोजगार प्राप्त करने का माध्यम न रहकर व्यक्ति को जीवन की वास्तविक परिस्थितियों के लिए तैयार करे। विद्यार्थी ज्ञान के साथ व्यवहारिक कौशल, चरित्र, आत्मविश्वास, नागरिक अधिकार एवं कर्तव्य, डिजिटल समझ, आर्थिक जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी भी सीखें।

"राष्ट्र निर्माण पुस्तक श्रृंखला" इसी व्यापक चिंतन का परिणाम है। लेखक का उद्देश्य किसी व्यवस्था या व्यक्ति की आलोचना करना नहीं, बल्कि वर्तमान परिस्थितियों को समझते हुए बेहतर समाज और बेहतर राष्ट्र के निर्माण के लिए विचार और संभावित दिशाएँ प्रस्तुत करना है।

उनका विश्वास है कि परिवर्तन की शुरुआत बाहर से नहीं, मनुष्य के भीतर से होती है—और उस परिवर्तन को स्थायी बनाने में परिवार और शिक्षा की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है।

Book Details

Publisher: प्रेम चेतना मंच
Number of Pages: 114
Availability: Available for Download (e-book)

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