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“राज और राज्य: मध्यकालीन भारत का इतिहास” मध्यकालीन भारत के राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विकास को समझने का एक व्यापक प्रयास है। यह पुस्तक उस ऐतिहासिक दौर की यात्रा कराती है, जब भारत में अनेक राजवंशों, सल्तनतों और साम्राज्यों का उदय हुआ तथा उनके बीच सत्ता, संघर्ष, विस्तार और परिवर्तन की निरंतर प्रक्रिया चलती रही।
पुस्तक में विभिन्न राजवंशों और शासकों के साथ-साथ उनकी शासन-व्यवस्था, प्रशासन, सैन्य शक्ति, आर्थिक नीतियों, कला-संस्कृति, धार्मिक एवं सामाजिक जीवन और भारतीय समाज पर पड़े उनके प्रभाव को सरल एवं क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत किया गया है।
यह पुस्तक केवल राजाओं और युद्धों का इतिहास नहीं है, बल्कि “राज” और “राज्य” के बदलते स्वरूप तथा उन परिवर्तनों के पीछे सक्रिय सामाजिक और राजनीतिक शक्तियों को समझने का प्रयास भी है।
इतिहास के विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले पाठकों, शोधार्थियों और भारतीय इतिहास में रुचि रखने वाले सामान्य पाठकों के लिए यह पुस्तक उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक हो सकती है। इसका उद्देश्य पाठक को मध्यकालीन भारत की ऐतिहासिक विरासत को तथ्यों, घटनाओं और उनके व्यापक संदर्भों के माध्यम से समझने का अवसर प्रदान करना है।
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