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‘अपने गीत’ रुपेश रंजन का एक भावनात्मक और आत्मीय काव्य-संग्रह है, जिसमें प्रेम, विरह, स्मृति, रिश्तों और जीवन के अनकहे अनुभवों को गीतात्मक अभिव्यक्ति दी गई है। यह संग्रह केवल प्रेम की सुंदरता का वर्णन नहीं करता, बल्कि उन भावनाओं को भी स्वर देता है जो अक्सर मनुष्य अपने भीतर छिपाकर रखता है।
इस पुस्तक में प्रेम को केवल पाने की आकांक्षा के रूप में नहीं, बल्कि समर्पण, प्रतीक्षा, मौन, दूरी, स्मृति और आत्मबोध के रूप में भी देखा गया है। कुछ गीत मिलन की कोमल अनुभूति को व्यक्त करते हैं, तो कुछ बिछड़ने के बाद बची हुई स्मृतियों और उस मौन को शब्द देते हैं, जिसे कहना आसान नहीं होता।
‘अपने गीत’ की विशेषता इसकी सहज भाव-भाषा है। कवि बड़े जीवन-सत्यों को रोजमर्रा के अनुभवों और सरल संवेदनाओं के माध्यम से व्यक्त करने का प्रयास करता है। प्रेम यहाँ किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता; वह स्मृतियों, रिश्तों, प्रकृति और स्वयं के भीतर की दुनिया से जुड़ता हुआ दिखाई देता है।
यह संग्रह उन पाठकों के लिए है जिन्होंने कभी किसी को चाहा है, किसी का इंतज़ार किया है, किसी रिश्ते को खोया है, या किसी पुरानी स्मृति को अपने भीतर आज भी जीवित पाया है।
‘अपने गीत’ अंततः प्रेम की एक ऐसी यात्रा है, जिसमें गीत बाहर से कम और भीतर से अधिक जन्म लेते हैं—जहाँ हर कविता किसी भावना की आवाज़ बन जाती है और हर स्मृति अपना एक गीत।
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