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भोरसँ साँझ धरि

भोरसँ साँझ धरि

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mishrarn 5 years, 2 months ago Verified Buyer

Re: भोरसँ साँझ धरि (eBook)

भोर सँ सॉंझ धरिक यात्रा एखने सम्पन्न भेल !

सरल-सहज, भावपूर्ण-प्रवाहपूर्ण, स्वर्णिम वाल्य-

काल सँ प्रारम्भ भेल जीवन-यात्राक अविरल धार

कखनहुँ अाद्योपान्त विरामक अवसर नहिं देलक ।

आत्माभिव्यक्तिक माध्यम सँ अपनेक अन्तस् मे

प्रच्छन्न लेखन-कलाक उद्घाटन अत्यन्त रोचक आ

हृदयस्पर्शी लागल । कृतित्व मे अपनेक व्यक्तित्व

सेहो अपन स्वाभाविक सम्पूर्णता मे प्रतिबिम्बित

भेल अछि, जाहि सँ पुस्तक आद्योपान्त प्राणवान,

रोचक आ लोकप्रियताक सर्वगुण-सम्पन्न लागल.




हमर हार्दिक प्रेमाभिवादनक संग अनेकानेक

शुभकामना ! लेखन के आयाम मे आओरो अनेकानेक विधाक जन्म अपनेक अन्तस् मे

होइत रहय आ सृजनात्मक जीवन-शैलीक

आनन्द भेटैत रहय !




बहुत-बहुत धन्यवाद !

श्रीनारायण.

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