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पहाड़ों में खुद की तलाश (eBook)

उस रहस्यमयी गाँव ने मेरी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल दी।
Type: e-book
Genre: Literature & Fiction, Travel
Language: Hindi
Price: ₹149
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

क्या आप तैयार हैं उस यात्रा के लिए, जहाँ रास्ते खत्म होते हैं और सन्नाटा बोलना शुरू करता है?

ईशान एक मशहूर ट्रेवल व्लॉगर है, जिसकी दुनिया 'व्यूज़', 'सब्सक्राइबर्स' और कैमरे के लेंस तक सिमट चुकी है। वह हिमालय के उस अंतिम छोर पर पहुँचता है जहाँ सड़कें दम तोड़ देती हैं और कोहरे की एक अभेद्य दीवार खड़ी हो जाती है। लेकिन यह केवल एक डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि 'शून्य' की पुकार थी।

"पहाड़ों में खुद की तलाश" जादुई यथार्थवाद (Magical Realism) और आध्यात्मिक रहस्य का एक ऐसा ताना-बाना है, जो आपको 'कल्प' नामक उस गाँव में ले जाता है जिसका अस्तित्व नक्शों पर नहीं, बल्कि रूह के भूगोल में है। यहाँ भौतिक विज्ञान के नियम काम नहीं करते; यहाँ समय एक सीधी रेखा नहीं बल्कि एक अनंत वृत्त है, जहाँ घड़ियाँ ठहर जाती हैं और यादें हवा में तैरती हैं।

इस रहस्यमयी यात्रा में आप अनुभव करेंगे:

आमा और उसकी कालजयी चाय: एक ऐसा प्याला जो स्वाद नहीं, बल्कि आपके अवचेतन में दबी उन यादों को ज़िंदा करता है जिन्हें आप शहर की भीड़ में भूल आए थे।

स्मृति झंडे (Memory Flags): पुराने पुल पर लहराते वो झंडे जिन पर मंत्र नहीं, बल्कि उन पूर्वजों के नाम लिखे हैं जो आज भी इस गाँव की हवाओं में सांस लेते हैं।

गुफा के भीतर का ब्रह्मांड: एक ऐसा 'पोर्टल' जहाँ शरीर का भार गिर जाता है और आप अपने अहंकार (Ego) की केंचुल उतारकर अपने असली स्वरूप से मिलते हैं।

परछाईं का विद्रोह: क्या होगा जब आपकी अपनी परछाईं आपसे अलग होकर चलने लगे? क्या यह मतिभ्रम है या किसी ऊँचे आयाम (Higher Dimension) की शुरुआत?

विदुर-यात्री द्वारा रचित यह उपन्यास उन सभी के लिए है जो डिजिटल शोर के बीच अपना 'मौन' खो चुके हैं। यह कहानी आपको याद दिलाएगी कि कभी-कभी खुद को पाने के लिए, खुद को पूरी तरह खोना ज़रूरी होता है।

About the Author

विदुर-यात्री एक ऐसा नाम है जो किसी भौगोलिक पते से नहीं, बल्कि मन के आंतरिक नक्शों पर की गई यात्राओं से अपनी पहचान बनाता है। लेखक का मानना है कि सबसे कठिन यात्रा वह है जो हम अपने भीतर की ओर करते हैं। 'विदुर-यात्री' का उद्देश्य उन अनकही कहानियों को शब्द देना है जो पहाड़ों के सन्नाटे, नदियों के शोर और मानवीय अवचेतन के रहस्यों में दबी हुई हैं।

भविष्य में, लेखक आध्यात्मिक यात्राओं और जादुई यथार्थवाद (Magical Realism) की इसी शैली को और गहरा करने की योजना बना रहे हैं, ताकि आधुनिक पीढ़ी को अपनी जड़ों और अपने 'मौन' से फिर से जोड़ा जा सके। वे मानते हैं कि जब तक हमारी परछाईं हमारे पीछे छूटती रहेगी, यात्रा अधूरी है; असली मंज़िल तो वह है जहाँ परछाईं हमारे साथ-साथ चलने लगे।

Book Details

Number of Pages: 44
Availability: Available for Download (e-book)

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