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अयोध्या: तब और अब
आस्था, विरासत और एक उज्ज्वल कल की ओर
अयोध्या केवल एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, यादों और भावनाओं से जुड़ा एक पवित्र स्थान है। समय के साथ इस नगरी का स्वरूप बदला है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक पहचान आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
इस सुंदर सचित्र पुस्तक में सविता सिंह और ओमवीर सिंह पाठकों को अयोध्या की एक अनोखी यात्रा पर ले चलते हैं—1988 की अयोध्या से लेकर 2018 की यादों और 2024 के नए अनुभवों तक।
पुस्तक में आप पढ़ेंगे:
1988, 2018 और दिसंबर 2024 की तीन व्यक्तिगत यात्राओं की यादें।
श्रीराम मंदिर, हनुमानगढ़ी, सरयू घाट और तीर्थयात्रा के रास्तों में आए बदलाव।
22 जनवरी 2024 की प्राण-प्रतिष्ठा से जुड़ी पारिवारिक भावनाएँ।
अयोध्या में पर्यटन, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का बदलता स्वरूप।
विकास के साथ स्थानीय लोगों, परंपराओं और शहर की आत्मा को बनाए रखने की चुनौती।
भविष्य की अयोध्या की एक कल्पनात्मक झलक।
पुस्तक की विशेषता है सविता सिंह की मौलिक पेंटिंग, जिसमें उन्होंने दिसंबर 2024 की यादगार यात्रा को अपने रंगों में उतारा है।
यह पुस्तक इतिहास का विस्तृत शोधग्रंथ नहीं, बल्कि आस्था, व्यक्तिगत अनुभव, कला और बदलते शहर की एक सरल सचित्र यात्रा है।
लेखक: सविता सिंह एवं ओमवीर सिंह
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