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जीवन में कभी सुख आता है, कभी दुख।
हम पूछते हैं "क्यों मेरे साथ ही ऐसा हुआ?"
पर जवाब मिलता है... "भगवान तो मनमानी करते हैं।"यह पुस्तक शिकायत से शुरू होकर समर्पण पर खत्म होती है।
भाव विभ्वल लेखिका सुमित्रा गुप्ता 'सखी' ने अपने अनुभवों, भावों और प्रार्थनाओं के माध्यम से यह समझाया है कि भगवान की हर लीला में कोई न कोई कारण छिपा होता है।
"सुख भी मुझे प्यारे हैं, दुख भी मुझे प्यारे हैं..."
"दुख में दर्शन होता है, और सुख में शुक्राना"अगर आप भी जीवन की उलझनों में शांति और उत्तर ढूंढ रहे हैं, तो यह आत्मिक यात्रा आपके लिए है।
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