You can access the distribution details by navigating to My pre-printed books > Distribution
जीवन के उतार-चढ़ाव में जब मन प्रश्नों से भर जाता है, तब ईश्वर के उत्तर हमें मौन में मिलते हैं। 'भगवान तो मनमानी करते हैं' केवल पुस्तक नहीं, बल्कि एक आत्मिक अनुभव है - शिकायत से कृतज्ञता तक की यात्रा, उलझन से समर्पण तक का पड़ाव। इस कृति में जीवन-अनुभव, आध्यात्मिक-ऊर्जा, संवेदना और आत्मचिंतन का सुंदर समन्वय है। ये शब्द नहीं, भाव हैं जो सीधे हृदय को स्पर्श करते हैं और पाठक को आत्ममंथन के साथ-साथ आनंदानुभूति भी कराते हैं। यह पुस्तक बताती है कि ईश्वर की हर 'मनमानी' के पीछे हमारा ही कल्याण छिपा है।
हमें ये मानकर ही समर्पण करते रहना चाहिए।
: ईश्वरीय सत्ता कण-कण में व्याप्त है। सब रूप और सब कुछ वही बने हुए हैं, ये गहन अनुभव से अनुभूति होने लगती है।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book “भगवान तो मनमानी करते हैं.