You can access the distribution details by navigating to My pre-printed books > Distribution

Add a Review

हमें और मत बाँटो (eBook)

Type: e-book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹299
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

कविता तब जन्म लेती है, जब समाज बोलना भूल जाता है, और कवि वह कह देता है, जो हम सब महसूस तो करते हैं, पर स्वीकार करने का साहस नहीं जुटा पाते।
“हमें और मत बाँटो” केवल एक कविता-संग्रह नहीं है; यह हमारे समय का आईना है। एक ऐसा आईना, जिसमें हम अपना चेहरा देखना तो चाहते हैं, पर सच दिख जाने के डर से नज़रें चुरा भी लेते हैं।
इस संग्रह की कविताएँ किसी एक विषय तक सीमित नहीं हैं। ये मनुष्य के टूटते रिश्तों, बिखरते गाँवों, खोते बचपन, कमज़ोर होते भाईचारे, तथा धर्म, सत्ता और स्वार्थ के गठजोड़ से उपजी दरारों के संवेदनशील दस्तावेज़ हैं।
“गाँव का सूनापन” हमें पूछने पर मजबूर करता है, विकास की इस दौड़ में आखिर लोग कहाँ खो गए? “विधवा माँ” और “मेरा बचपन” उस पीड़ा को स्वर देते हैं, जो आँकड़ों में कभी दर्ज नहीं होती। “धर्म का धंधा” और “ये कैसा भाईचारा है” हमारे समय के सबसे असहज प्रश्नों को पूरी ईमानदारी से हमारे सामने रख देते हैं।
इन कविताओं की सबसे बड़ी ताक़त इनकी सरलता है। यह सरलता कमज़ोरी नहीं, बल्कि गहराई की पहचान है। यह वही भाषा है, जो आम आदमी की साँसों में बसती है जो सड़क, खेत, गली और घर की देहरी से उठती है।
लेखक न तो उपदेश देता है, न ही किसी विचारधारा का शोर मचाता है। वह बस मनुष्य को मनुष्य बने रहने की एक विनम्र प्रार्थना करता है।

About the Author

स्वर्ण सिंह एक संवेदनशील हृदय के कवि और गहन विचारों के रचनाकार हैं। यह उनका पहला कविता-संग्रह है, एक ऐसी पहली दस्तक, जिसमें जीवन ने जो कुछ दिया, वही शब्द बनकर उतर आया। इन कविताओं की पंक्तियाँ अनुभवों की भट्ठी में तपकर निकली हैं अनकही पीड़ाओं, भीतर उमड़ती संवेदनाओं और आत्मसंघर्ष की सच्ची गवाही हैं। यहाँ कोई बनावट नहीं, कोई कृत्रिम शिल्प नहीं, सिर्फ़ दिल से निकली वह आवाज़ है, जो बिना शोर किए बहुत कुछ कह जाती है।
स्वर्ण सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय से B.COM. तथा ICAI से Semi Qualified Chartered Accountant की शिक्षा प्राप्त की हैं । AAFT से फिल्म स्क्रिप्ट राइटिंग का सर्टिफिकेट कोर्स किया है और बर्तमान में स्क्रिप्ट राइटिंग एसोसिएशन के सदस्य हैं !
उनकी कविताओं में समाज की कड़वी-मीठी सच्चाइयाँ, मानवीय संवेदनाएँ और भीतर चलने वाले द्वंद्व साफ़ दिखाई देते हैं।
यह कविता-संग्रह उसी विश्वास के साथ पाठकों के हाथों में सौंपा गया एक विनम्र, ईमानदार और भावपूर्ण प्रयास है जो शोर नहीं मचाता, बस चुपचाप मन के दरवाज़े पर दस्तक देता है!

Book Details

Publisher: स्वर्ण कुमार सिंह
Number of Pages: 88
Availability: Available for Download (e-book)

Ratings & Reviews

हमें और मत बाँटो

हमें और मत बाँटो

(Not Available)

Review This Book

Write your thoughts about this book.

Currently there are no reviews available for this book.

Be the first one to write a review for the book हमें और मत बाँटो.

Other Books in Poetry

Shop with confidence

Safe and secured checkout, payments powered by Razorpay. Pay with Credit/Debit Cards, Net Banking, Wallets, UPI or via bank account transfer and Cheque/DD. Payment Option FAQs.