You can access the distribution details by navigating to My pre-printed books > Distribution

Add a Review

हमें और मत बाँटो (eBook)

Type: e-book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹49
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

कविता तब जन्म लेती है, जब समाज बोलना भूल जाता है, और कवि वह कह देता है, जो हम सब महसूस तो करते हैं, पर स्वीकार करने का साहस नहीं जुटा पाते।
“हमें और मत बाँटो” केवल एक कविता-संग्रह नहीं है; यह हमारे समय का आईना है। एक ऐसा आईना, जिसमें हम अपना चेहरा देखना तो चाहते हैं, पर सच दिख जाने के डर से नज़रें चुरा भी लेते हैं।
इस संग्रह की कविताएँ किसी एक विषय तक सीमित नहीं हैं। ये मनुष्य के टूटते रिश्तों, बिखरते गाँवों, खोते बचपन, कमज़ोर होते भाईचारे, तथा धर्म, सत्ता और स्वार्थ के गठजोड़ से उपजी दरारों के संवेदनशील दस्तावेज़ हैं।
“गाँव का सूनापन” हमें पूछने पर मजबूर करता है, विकास की इस दौड़ में आखिर लोग कहाँ खो गए? “विधवा माँ” और “मेरा बचपन” उस पीड़ा को स्वर देते हैं, जो आँकड़ों में कभी दर्ज नहीं होती। “धर्म का धंधा” और “ये कैसा भाईचारा है” हमारे समय के सबसे असहज प्रश्नों को पूरी ईमानदारी से हमारे सामने रख देते हैं।
इन कविताओं की सबसे बड़ी ताक़त इनकी सरलता है। यह सरलता कमज़ोरी नहीं, बल्कि गहराई की पहचान है। यह वही भाषा है, जो आम आदमी की साँसों में बसती है जो सड़क, खेत, गली और घर की देहरी से उठती है।
लेखक न तो उपदेश देता है, न ही किसी विचारधारा का शोर मचाता है। वह बस मनुष्य को मनुष्य बने रहने की एक विनम्र प्रार्थना करता है।

About the Author

स्वर्ण सिंह एक संवेदनशील कवि, लेखक और कथाकार हैं, जिनकी लेखनी जीवन के वास्तविक अनुभवों, सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं से आकार लेती है। बिहार के पूर्णिया जिले के शाहवान खूँट गाँव से निकलकर महानगरीय जीवन तक की उनकी यात्रा ने उन्हें समाज के अनेक रंगों संघर्ष, विस्थापन, रिश्तों, स्मृतियों, असमानताओं और बदलते मानवीय मूल्यों को बहुत करीब से देखने और महसूस करने का अवसर दिया है।
उनका पहला कविता-संग्रह “हमें और मत बाँटो” केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि उनके जीवन-अनुभवों की एक सच्ची और आत्मीय अभिव्यक्ति है। इसकी पंक्तियाँ कल्पना से अधिक जीवन की तपिश में ढली हैं कहीं गाँव और बचपन की स्मृतियाँ हैं, कहीं रिश्तों की नमी, कहीं सामाजिक विडंबनाओं पर सवाल, तो कहीं मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने की बेचैनी। उनकी कविता की सबसे बड़ी विशेषता उसकी सहजता है यह शोर नहीं करती, बल्कि चुपचाप पाठक के मन के दरवाज़े पर दस्तक देती है।

स्वर्ण सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम. की शिक्षा प्राप्त की तथा ICAI से Semi-Qualified Chartered Accountant हैं। संख्याओं और वित्त की पेशेवर दुनिया से जुड़े रहने के बावजूद साहित्य और सृजनात्मक लेखन से उनका रिश्ता लगातार बना रहा। कहानी और सिनेमा के प्रति इसी रुचि ने उन्हें AAFT (Asian Academy of Film & Television) से Film Script Writing का Certificate Course करने के लिए प्रेरित किया। वे वर्तमान में Screenwriters Association (SWA) के सदस्य भी हैं।

उनकी रचनाओं में समाज की कड़वी-मीठी सच्चाइयाँ, आम आदमी के संघर्ष, मानवीय रिश्तों की जटिलताएँ और व्यक्ति के भीतर चलने वाला द्वंद्व बार-बार उभरकर सामने आता है। वे कविता के साथ-साथ कहानी, गीत और पटकथा लेखन में भी सक्रिय हैं।
उनकी साहित्यिक यात्रा अब कविता से आगे बढ़ चुकी है। उनका दूसरा प्रकाशित साहित्यिक कार्य, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पृष्ठभूमि पर आधारित उपन्यास “अंधभक्ति”, आस्था और अंधविश्वास के बीच की महीन रेखा पर गंभीर प्रश्न उठाता है।
“हमें और मत बाँटो” उनकी साहित्यिक यात्रा की पहली दस्तक है एक ऐसी दस्तक, जिसमें गाँव की मिट्टी की खुशबू भी है, महानगर के संघर्ष की थकान भी, बीते समय की स्मृतियाँ भी और आने वाले कल के लिए एक बेहतर समाज की उम्मीद भी।

Book Details

Publisher: स्वर्ण कुमार सिंह
Number of Pages: 64
Availability: Available for Download (e-book)

Ratings & Reviews

हमें और मत बाँटो

हमें और मत बाँटो

(Not Available)

Review This Book

Write your thoughts about this book.

Currently there are no reviews available for this book.

Be the first one to write a review for the book हमें और मत बाँटो.

Other Books in Poetry

Shop with confidence

Safe and secured checkout, payments powered by Razorpay. Pay with Credit/Debit Cards, Net Banking, Wallets, UPI or via bank account transfer and Cheque/DD. Payment Option FAQs.