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"साथी तेरा प्यार पूजा है " यह मेरी खुद की जीवन की सच्ची प्रेम कहानी है। बचपन में स्कूल मैं शुरू हुई थी और स्कूल छोड़ने के बाद हमारे रस्ते अलग अलग हो गए। अब 12 साल बाद जब हमारी बातचीत होती है ,तब पता चलता है कि दोनों आज तक एक दूसरे के बिना भी एक दूसरे के यादों में जी रहे हैं। पर कुछ परेशानियों की वजह से हमारा मिलना असंभव है । बचपन की कुछ यादें और इस 12 साल की सफर की कुछ बातों को में इस कहानी मे लिख रही हूं ।मुझे इस कहानी का अंत अभी तक पता नहीं । इसीलिए मैं इसे कुछ भागो (parts)में लिख रही हूं।
अब तक तो ऐसे बहत सारे फिल्म बन चुकी है। पर मैने यह कभी सोचा नहीं था कि मेरी कहानी उस फिल्मों की तरह होगी । सुना है दुआओं से तकदीर भी बदल जाती है। अगर आप लोगों की दुआओं से और भगवान की कृपा से मेरी यह कहानी हमारी मिलन से खत्म हो पाई तो मैं आप लोगों की बहत बहत आभारी रहूंगी और अगर न भी हो पायी तो यह किताबों में हमेशा के लिए अमर हो कर रह जाएगी ।
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