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'तीनों की यात्रा' - दोस्ती, आस्था और संघर्ष का जीवंत दस्तावेज परिचय 'तीनों की यात्रा' युवा लेखक अभिषेक यादव द्वारा लिखित एक रोमांचक यात्रा वृत्तांत है । यह पुस्तक केवल धार्मिक स्थलों के दर्शन के बारे में नहीं है, बल्कि यह तीन दोस्तों— अभिषेक, राहुल और पीयूष— की दोस्ती, आपसी नोक-झोंक और आस्था का एक सच्चा दस्तावेज है ।
यात्रा का विवरण कहानी की शुरुआत भोपाल से होती है, जहाँ से तीनों दोस्त जनरल डिब्बे के धक्के खाते हुए अयोध्या, वाराणसी (काशी) और प्रयागराज (कुंभ) के लिए निकलते हैं । लेखक ने अयोध्या में रामलला के दर्शन के उत्साह, वाराणसी की गलियों में भटकने और मणिकर्णिका घाट पर जीवन की नश्वरता (मृत्यु के सत्य) को बहुत ही गहराई से लिखा है । प्रयागराज के कुंभ मेले में भीड़ का भयावह रूप और वहाँ से जान बचाकर स्टेशन की दीवार फांदकर भागने का किस्सा पाठकों के रोंगटे खड़े कर देता है |
Aap sabhi ko kaisi lagi likhna jarur
Jay shree ram Jai hind
दोस्ती और आस्था की यात्रा
यह पुस्तक केवल एक यात्रा-वृत्तांत नहीं, बल्कि दोस्ती, आस्था और रास्ते में मिलने वाले अनगिनत अनुभवों का जीवंत दस्तावेज़ है। अभिषेक की दृष्टि कहानी को ज़मीन से जोड़कर रखती है—जहाँ हास्य है, थकान है, झिझक है और साथ ही गहरी श्रद्धा भी। भाषा सहज है और घटनाएँ ऐसी लगती हैं जैसे पाठक स्वयं उस यात्रा का हिस्सा हो। यह किताब पढ़ते हुए स्थान नहीं, अनुभव याद रह जाते हैं।