यह पुस्तक केवल एक यात्रा-वृत्तांत नहीं, बल्कि दोस्ती, आस्था और रास्ते में मिलने वाले अनगिनत अनुभवों का जीवंत दस्तावेज़ है। अभिषेक की दृष्टि कहानी को ज़मीन से जोड़कर रखती है—जहाँ हास्य है, थकान है, झिझक है और साथ ही गहरी श्रद्धा भी। भाषा सहज है और घटनाएँ ऐसी लगती हैं जैसे पाठक स्वयं उस यात्रा का हिस्सा हो। यह किताब पढ़ते हुए स्थान नहीं, अनुभव याद रह जाते हैं।
यह पुस्तक केवल एक यात्रा-वृत्तांत नहीं, बल्कि दोस्ती, आस्था और रास्ते में मिलने वाले अनगिनत अनुभवों का जीवंत दस्तावेज़ है। अभिषेक की दृष्टि कहानी को ज़मीन से जोड़कर रखती है—जहाँ हास्य है, थकान है, झिझक है और साथ ही गहरी श्रद्धा भी। भाषा सहज है और घटनाएँ ऐसी लगती हैं जैसे पाठक स्वयं उस यात्रा का हिस्सा हो। यह किताब पढ़ते हुए स्थान नहीं, अनुभव याद रह जाते हैं।
दोस्ती और आस्था की यात्रा
यह पुस्तक केवल एक यात्रा-वृत्तांत नहीं, बल्कि दोस्ती, आस्था और रास्ते में मिलने वाले अनगिनत अनुभवों का जीवंत दस्तावेज़ है। अभिषेक की दृष्टि कहानी को ज़मीन से जोड़कर रखती है—जहाँ हास्य है, थकान है, झिझक है और साथ ही गहरी श्रद्धा भी। भाषा सहज है और घटनाएँ ऐसी लगती हैं जैसे पाठक स्वयं उस यात्रा का हिस्सा हो। यह किताब पढ़ते हुए स्थान नहीं, अनुभव याद रह जाते हैं।