Description
'माँ ने जो नहीं कहा…’ नवल किशोर सोनी का संवेदनशील और भावनात्मक उपन्यास है, जो माँ-बेटी के रिश्ते, अनकहे प्रेम, त्याग, संघर्ष, स्मृतियों और जीवन की आकांक्षाओं को केंद्र में रखता है। यह कहानी उस माँ की भावनाओं को समझने का प्रयास करती है, जो अपने बच्चों के लिए जीवन भर बहुत कुछ करती है, लेकिन अपनी इच्छाओं, सपनों और पीड़ा को अक्सर शब्द नहीं दे पाती।
एक बेटी की दृष्टि से माँ के जीवन को देखने वाली यह कहानी अतीत की स्मृतियों, वर्तमान की संवेदनाओं और भविष्य की उम्मीदों के बीच आगे बढ़ती है। माँ की चुप्पी, उसके निर्णयों और उसके छोटे-बड़े त्यागों के पीछे छिपे प्रेम को समझते हुए कहानी पाठक को रिश्तों की उन गहराइयों तक ले जाती है, जहाँ बहुत कुछ कहा नहीं जाता, केवल महसूस किया जाता है।
यह उपन्यास केवल माँ की कहानी नहीं, बल्कि परिवार, स्त्री-मन, रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं की कहानी है। सरल, आत्मीय और प्रभावशाली भाषा में लिखी गई यह कृति पाठक को अपने जीवन की माँ, अपने रिश्तों और उन अनकहे भावों को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करती है।
नवल किशोर सोनी
माता-पिता : स्व.श्रीमती कमला देवी, स्व. श्री लड्डू लाल सोनी
जन्म: 10 नवम्बर 1974, माँगरोल, जिला बारां, राजस्थान
जीवन संगिनी: श्रीमती मंजू सोनी (प्राध्यापिका, राजकीय सीनियर माध्यमिक विद्यालय, अजमेर)
पुत्री: नव्या सोनी (अध्ययनरत)
शिक्षा: एम.ए., बी.एड़., एल.एल.बी., एम.एस.डब्ल्यू.(समाज कार्य में स्नातकोत्तर)
सामाजिक सरोकारों से विशेष जुड़ाव। साहित्य कलाओं में अभिरुचि। बोधि प्रकाशन, जयपुर से निराशाओं के पार काव्य संग्रह (2022) प्रकाशित, अर्पिता : एक देवदासी (उपन्यास) प्रकाशित, रिश्ता तेरा मेरा (दो न्यायाधीशों की प्रेम कहानी), उपन्यास (2026) प्रकाशित, कहानियों के आईने में जीवन कौशल (21वीं सदी के जीवन कौशलों पर आधारित कहानियाँ), शहर,स्पा और चंचल, आचूकी: अधूरी पढ़ाई से नई उड़ान तक, रक्तिम क्षितिज के उस पार, शिक्षा में सुधार : चुनौतियाँ एवं संभावनाएं -पुस्तक प्रकाशित (2026)। आओ, तुम्हें मैं मीत लिखूँ (काव्य संग्रह), संघर्ष से सृजन तक (आत्मकथा) प्रकाशित, कविता, कहानी एवं समसामयिक विषयों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर लेखन।
‘शिक्षा विमर्श’ पत्रिका में शिक्षा पर विभिन्न आलेख प्रकाशित। प्रतिलिपि ऐप पर निरंतर कविताएँ, कहानियाँ और लेख प्रकाशित। शिक्षा और कानून से जुड़े मुद्दों पर संवाद और लेखन में रुचि। शिक्षा के माध्यम से बदलाव हेतु प्रयासरत। मृत्यु के बाद समस्त अंग और देह दान का संकल्प।
यूनिसेफ, ऑक्सफेम, केयर इण्डिया, दिगंतर, सेव द चिल्ड्रन जैसी संस्थाओं के साथ जुड़कर विभिन्न शैक्षिक परियोजनाओं के संचालन में सहयोग। समता शिक्षा समिति, शैक्षिक सरोकार मंच और तार्किक दुनिया के संस्थापक। वर्तमान में बालिका शिक्षा के लिए कार्यरत रमन मैग्सेसे अवॉर्डी संस्था एजुकेट गर्ल्स के लिए शिक्षाक्रम, पाठ्यक्रम और विषयवस्तु निर्माण के कार्य में संलग्न ।
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मकान नंबर-15, विनायक विहार
गणपतपुरा, मानसरोवर,जयपुर 302020 (राजस्थान)
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