You can access the distribution details by navigating to My pre-printed books > Distribution

Add a Review

उनसे जो कह ना पाया (eBook)

Type: e-book
Genre: Romance, Self-Improvement
Language: Hindi
Price: ₹129
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF, EPUB

Description

उनसे जो कह न पाया एक अधूरी मोहब्बत, बीस साल की ख़ामोशी और ढाई घंटे की मुलाक़ात

क्या होता है जब दिल की सबसे ज़रूरी बात कहने में बीस साल लग जाएँ?

कुछ रिश्तों को कोई नाम नहीं मिलता। कुछ प्रेम कहानियाँ किसी वादे तक नहीं पहुँचतीं। और कुछ मुलाक़ातें ऐसी होती हैं, जिनमें चंद घंटे के भीतर पूरा जीवन फिर से आँखों के सामने आ खड़ा होता है।

वीर और किरण की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

कॉलेज के दिनों में वीर के पास किरण से कहने के लिए बहुत कुछ था। वह उससे अपने सपने साझा करता था, अपनी परेशानियाँ बताता था और उसके साथ घंटों बातें करता था। किरण उसकी बातों को समझती थी, उसकी क्षमताओं पर विश्वास करती थी और मुश्किल समय में उसका साथ देती थी। उनके बीच एक अनकहा रिश्ता था—लेकिन उस रिश्ते को शब्द देने का साहस वीर कभी नहीं जुटा पाया।

उसे लगता था कि पहले जीवन में स्थिरता आ जाए, परिवार की जिम्मेदारियाँ पूरी हो जाएँ और भविष्य सुरक्षित हो जाए, फिर वह अपने दिल की बात कहेगा।

लेकिन जीवन किसी के तैयार होने का इंतज़ार नहीं करता।

समय बीत गया। दोनों ने अपने-अपने परिवार बसाए, अपनी जिम्मेदारियाँ निभाईं और जीवन में आगे बढ़ गए। फिर, बीस साल की ख़ामोशी के बाद, एक पुराने कॉलेज समूह में दो नाम दोबारा आमने-सामने आए—वीर और किरण।

एक नाम ने यादों का दरवाज़ा खोल दिया। कुछ पुरानी बातें लौट आईं, कुछ सवाल फिर जाग उठे और एक अधूरी कहानी अपने सबसे कठिन मोड़ पर पहुँच गई।

फिर आती है वह मुलाक़ात—सिर्फ़ ढाई घंटे की।

ढाई घंटे, जिनमें बीस साल की ख़ामोशी को शब्द मिलने हैं। ढाई घंटे, जिनमें अतीत और वर्तमान आमने-सामने खड़े हैं। ढाई घंटे, जिनके बाद शायद सब कुछ पहले जैसा रह जाए—या भीतर कुछ हमेशा के लिए बदल जाए।

लेकिन क्या अपने मन की बात कह देना ही पर्याप्त है? क्या हर अनकहे प्रेम का कोई उत्तर होता है? और क्या जीवन में कुछ प्रश्न ऐसे भी होते हैं, जिनका उत्तर मिल जाने से अधिक ज़रूरी उन्हें पूछने का साहस जुटाना होता है?

‘उनसे जो कह न पाया’ केवल एक अधूरी प्रेम कहानी नहीं है। यह उन सपनों की कहानी है जिन्हें हम जिम्मेदारियों के नाम पर टालते रहते हैं, उन अवसरों की जिन्हें हम सही समय की प्रतीक्षा में खो देते हैं और उन शब्दों की, जो कभी-कभी जीवन भर हमारे भीतर गूँजते रहते हैं।

यह कहानी आपको किसी पुराने चेहरे की याद दिला सकती है। किसी अधूरे संवाद की। किसी ऐसे क्षण की, जब आप कुछ कहना चाहते थे—लेकिन कह नहीं पाए।

क्योंकि कभी-कभी जीवन में सबसे बड़ा पछतावा वह नहीं होता जो हमने किया, बल्कि वह होता है जिसे करने का साहस हम कभी जुटा ही नहीं पाए।

कुछ प्रेम कहानियाँ साथ रहने से पूरी होती हैं। कुछ बिछड़कर भी अधूरी नहीं होतीं। और कुछ कहानियाँ बीस साल बाद भी एक सवाल पूछती हैं—

अगर उस दिन कह दिया होता, तो क्या होता?

About the Author

लेखक परिचय — अमर सिंह

अमर सिंह एक संवेदनशील लेखक हैं, जिन्हें मानवीय भावनाओं, रिश्तों की गहराइयों और जीवन की अनकही कहानियों को शब्दों में पिरोना पसंद है। उनकी लेखनी में प्रेम, कर्तव्य, संघर्ष, स्मृतियों और समय के साथ बदलते जीवन की सहज अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।

उनकी कहानियाँ उन भावनाओं को आवाज़ देती हैं, जिन्हें इंसान अक्सर अपने भीतर दबाकर रखता है—कभी परिस्थितियों के कारण, कभी जिम्मेदारियों के बोझ तले और कभी सही समय पर अपने मन की बात न कह पाने के कारण। उनके लेखन में पात्र केवल काल्पनिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि जीवन की उन सच्चाइयों के प्रतिबिंब हैं, जिनसे पाठक स्वयं को जुड़ा हुआ महसूस कर सकते हैं।

अमर सिंह का मानना है कि जीवन की सबसे गहरी कहानियाँ अक्सर उन बातों में छिपी होती हैं, जो कही नहीं जातीं, उन रिश्तों में जो अधूरे रह जाते हैं और उन पलों में, जिनका महत्व हमें बहुत देर से समझ आता है।

उनका उपन्यास ‘उनसे जो कह न पाया’ प्रेम, स्मृतियों, पछतावे और समय के बीत जाने के बाद भी मन में जीवित रहने वाली भावनाओं की एक मार्मिक कहानी है। उनकीउनसे जो कह न पाया एक अधूरी मोहब्बत, बीस साल की ख़ामोशी और ढाई घंटे की मुलाक़ात

क्या होता है जब दिल की सबसे ज़रूरी बात कहने में बीस साल लग जाएँ?

कुछ रिश्तों को कोई नाम नहीं मिलता। कुछ प्रेम कहानियाँ किसी वादे तक नहीं पहुँचतीं। और कुछ मुलाक़ातें ऐसी होती हैं, जिनमें चंद घंटे के भीतर पूरा जीवन फिर से आँखों के सामने आ खड़ा होता है।

वीर और किरण की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

कॉलेज के दिनों में वीर के पास किरण से कहने के लिए बहुत कुछ था। वह उससे अपने सपने साझा करता था, अपनी परेशानियाँ बताता था और उसके साथ घंटों बातें करता था। किरण उसकी बातों को समझती थी, उसकी क्षमताओं पर विश्वास करती थी और मुश्किल समय में उसका साथ देती थी। उनके बीच एक अनकहा रिश्ता था—लेकिन उस रिश्ते को शब्द देने का साहस वीर कभी नहीं जुटा पाया।

उसे लगता था कि पहले जीवन में स्थिरता आ जाए, परिवार की जिम्मेदारियाँ पूरी हो जाएँ और भविष्य सुरक्षित हो जाए, फिर वह अपने दिल की बात कहेगा।

लेकिन जीवन किसी के तैयार होने का इंतज़ार नहीं करता।

समय बीत गया। दोनों ने अपने-अपने परिवार बसाए, अपनी जिम्मेदारियाँ निभाईं और जीवन में आगे बढ़ गए। फिर, बीस साल की ख़ामोशी के बाद, एक पुराने कॉलेज समूह में दो नाम दोबारा आमने-सामने आए—वीर और किरण।

एक नाम ने यादों का दरवाज़ा खोल दिया। कुछ पुरानी बातें लौट आईं, कुछ सवाल फिर जाग उठे और एक अधूरी कहानी अपने सबसे कठिन मोड़ पर पहुँच गई।

फिर आती है वह मुलाक़ात—सिर्फ़ ढाई घंटे की।

ढाई घंटे, जिनमें बीस साल की ख़ामोशी को शब्द मिलने हैं। ढाई घंटे, जिनमें अतीत और वर्तमान आमने-सामने खड़े हैं। ढाई घंटे, जिनके बाद शायद सब कुछ पहले जैसा रह जाए—या भीतर कुछ हमेशा के लिए बदल जाए।

लेकिन क्या अपने मन की बात कह देना ही पर्याप्त है? क्या हर अनकहे प्रेम का कोई उत्तर होता है? और क्या जीवन में कुछ प्रश्न ऐसे भी होते हैं, जिनका उत्तर मिल जाने से अधिक ज़रूरी उन्हें पूछने का साहस जुटाना होता है?

Book Details

Number of Pages: 147
Availability: Available for Download (e-book)

Ratings & Reviews

उनसे जो कह ना पाया

उनसे जो कह ना पाया

(Not Available)

Review This Book

Write your thoughts about this book.

Currently there are no reviews available for this book.

Be the first one to write a review for the book उनसे जो कह ना पाया.

Other Books in Romance, Self-Improvement

Shop with confidence

Safe and secured checkout, payments powered by Razorpay. Pay with Credit/Debit Cards, Net Banking, Wallets, UPI or via bank account transfer and Cheque/DD. Payment Option FAQs.