Description
स्व . हरिवंश राय 'बच्च न' जी की 'मधुशाला'– के मधुघट में मधुसागर भरा है। इसकी बराबरी तो क्याव, इसके पास भी पहुँचना असंभव नहीं तो कठिनतम् अवश्य है। लेकिन पूर्ववर्ती पीढ़ी अपनी अगली पीढ़ी पर गर्व कर सके, ये प्रयास तो करने ही होंगे। सोमरस पर रची गई वैदिक ऋृचाओं से लेकर सातवीं शताब्दी के अरबी कवि 'अबू नुवास', आठवीं सदी के चीनी
दार्शनिक कवि 'ली बाई', ग्यारहवीं सदी के फारसी कवि 'उमर खैय्याम', अठारहवीं सदी के 'मिर्जा गालिब' , बीसवीं सदी के 'डा. हरिवंश राय बच्चन' सहित सैंकड़ों कवियों, लेखकों ने दार्शनिक गहराई दिया है। इस श्रेणी में स्थान बनाना निश्चित रूप से कठिन है।
लेकिन मुझे विश्वास है- अब आगे जब भी 'हाला' एवं 'हालावाद' पर विमर्श होंगे तो मुझे एवं मेरी 'मधुशाला महाकाव्यम्' को भूलना आसान नहीं होगा। पूर्वजों ने केवल खण्ड काव्य लिखे, यह तो अबतक करीब 12500 चतुष्पणदियों का महाकाव्य है। विश्व भर के किसी भी भाषा में इस विषय-विशेष पर इतनी बड़ी रचना इतिहास या वर्तमान में उल्लेखित नहीं है।
आईये! हर भाग में 500 चतुष्पदियों के साथ इस प्रथम भाग का मिलकर रसास्वादन करते हैं।
श्री अशोक कुमार ठाकुर हिन्दीा के साहित्यककार कवि एवं रचनाकार हैं। 22 दिसंबर 1960 में उनका जन्मि बिहार के समस्ती्पुर जिले के कल्याअणपुर प्रखंड के फुलहट्टा (पंचायत क्लौं जर घाट) नामक ग्राम में भूमिहार ब्राह्मण कुल में हुआ। फुलहट्टा, सैदपुर, मालीनगर से विद्यालीय शिक्षा तथा महेश प्रसाद सिन्हा( सायंस कॉलेज एवं रामदयालु सिंह महाविद्यालय, मुजफ्फरपुर (बिहार विश्वंविद्यालय) से विज्ञान में स्नाातक तक शिक्षा प्राप्तह की। फिर मगध विश्वियद्यालय के भारतीय व्याापार प्रबंधन संस्थापन, पटना से इन्होंिने एम.बी.ए. किया।
1975 से उनकी रचनाएँ अशोक कुमार टैगोर के नाम से प्रकाश में आने लगी। उन्हों ने 12500 चतुष्प दियों के साथ एक विषय-विशेष पर और तुकांत 'मधुशाला' के साथ पूर्ण होने वाली मधुशाला महाकाव्य म् की 25 भागों की रचना की है, जो अब तक विश्वस की किसी भी भाषा में की गई सबसे बड़ी एवं विशिष्टप रचना है। उन्होंोने स्वीर्गीय हरिवंश राय बच्चंन जी के बनाये आधार शिला पर 92 गुणी बड़ी 25 मंजिली विराट साहित्यं की ईमारत खड़ी कर दी है। इनकी अन्य काव्यी रचनाओं में वैशाली की राजनर्तक आम्रपाली, मधु मंजरी, दोहा सहस्त्र म्, प्रेम दोहा मंजरी, मधुसाली, नेह निमंत्रण, प्रतीक्षा, पीऊँ कहाँ, अनुत्तरित यक्ष प्रश्नन, पूनम का चाँद, तुम्हा रे लिए, अंतरिक्ष के पार, सपनों के देश में सहित अबतक करीब 40 कृतियाँ हैं।
अशोक कुमार टैगोर ने बिहार सरकार में उद्यमिता विकास पदाधिकारी एवं सृष्टि फाउण्डेरशन, पटना के प्रवर्तक अध्य क्ष के रूप में उद्यमिता विकास, ग्रामीण विकास, तकनीकी हस्तारन्तृरण, कौशल विकास, नवाचार तथा स्टाार्ट-अप प्रोत्साीहन देकर एक लाख से ज्याौदा लोगों के जीवन में सकारात्म क हस्त्क्षेप किया है। इनकी जीवन संगिनी डा0 नूतन, डा0 राजेन्द्रै प्रसाद केन्द्री य कृषि विश्व विद्यालय, पूसा, समस्तीापुर से मतस्यिकी विज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्तष कर राज्यी सरकार में अधिकारी हैं। पुत्री सुश्री सृष्टि श्रेया युनिवर्सिटी आफ लंदन से अर्थशास्त्र से स्ना।तकोत्तर शिक्षा प्राप्त कर अपना निजी उद्यम संचालित कर रही हैं, जबकि पुत्र श्रीजीत श्रेय यूनिवर्सिटी आफ लंदन से स्नारतक शिक्षा के बाद अब यूनिवर्सिटी आफ जूरिच स्वी ट्जरलैंड से आर्टिफिशिल इंटेलिजेंश एवं न्यूररो सायंस में उच्चज शिक्षा प्राप्तट कर रहे हैं। (2026)।
इनकी साहित्य् दृष्टि में परंपरा एवं आधुनिक चिंतन का समन्वीय तथा जीवन के विविध अनुभवों की काव्या्त्मंक अभिव्यचक्ति प्रमुख है। वर्तमान में पटना एवं गुरूग्राम में निवास। संपर्क सूत्र- aktagore9@gmail.com