Description
जीवन केवल वर्तमान का नाम नहीं है, बल्कि उन अनगिनत सपनों, आकांक्षाओं और उम्मीदों का भी नाम है, जिन्हें मनुष्य अपने हृदय में संजोकर भविष्य की ओर देखता है। इन्हीं उम्मीदों का सुंदर नाम है—‘प्रत्याशा’।
मनुष्य का जीवन अनेक प्रश्नों, संघर्षों और प्रतीक्षाओं से भरा होता है। कभी वह अपने प्रिय की प्रतीक्षा करता है, कभी अपनों के स्नेह की, कभी सफलता की और कभी ऐसे समय की, जब उसके जीवन में सुख, शांति और संतोष का आगमन हो। यह प्रतीक्षा ही उसके जीवन को अर्थ प्रदान करती है। किंतु प्रत्याशा केवल किसी वस्तु या व्यक्ति को पाने की इच्छा नहीं है; यह स्वयं को पहचानने, अपनी सीमाओं के पार जाने का अवसर भी देता है।
225 पेज की यह लघु काव्य रचना कवि द्वारा जीया गया यथार्थ भी है।
श्री अशोक कुमार ठाकुर हिन्दीा के साहित्य।कार कवि एवं रचनाकार हैं। 22 दिसंबर 1960 में उनका जन्म बिहार के समस्तीएपुर जिले के कल्याअणपुर प्रखंड के फुलहट्टा (पंचायत क्लौं जर घाट) नामक ग्राम में भूमिहार ब्राह्मण कुल में हुआ। फुलहट्टा, सैदपुर, मालीनगर से विद्यालीय शिक्षा तथा महेश प्रसाद सिन्हा सायंस कॉलेज एवं रामदयालु सिंह महाविद्यालय, मुजफ्फरपुर (बिहार विश्वंविद्यालय) से विज्ञान में स्नाातक तक शिक्षा प्राप्तह की। फिर मगध विश्वियद्यालय के भारतीय व्याापार प्रबंधन संस्था न, पटना से इन्होंलने एम.बी.ए. किया।
1975 से उनकी रचनाएँ अशोक कुमार टैगोर के नाम से प्रकाश में आने लगी। उन्होंतने 12500 चतुष्प दियों के साथ एक विषय-विशेष पर और तुकांत 'मधुशाला' के साथ पूर्ण होने वाली मधुशाला महाकाव्य म् की 25 भागों की रचना की है, जो अब तक विश्वस की किसी भी भाषा में की गई सबसे बड़ी एवं विशिष्टण रचना है। उन्होंवने स्वीर्गीय हरिवंश राय बच्च न जी के बनाये आधार शिला पर 92 गुणी बड़ी 25 मंजिली विराट साहित्यच की ईमारत खड़ी कर दी है। इनकी अन्य काव्यह रचनाओं में वैशाली की राजनर्तक आम्रपाली, मधु मंजरी, दोहा सहस्त्र म्, प्रेम दोहा मंजरी, मधुसाली, नेह निमंत्रण, प्रतीक्षा, पीऊँ कहाँ, अनुत्तरित यक्ष प्रश्नम, पूनम का चाँद, तुम्हाजरे लिए, अंतरिक्ष के पार, सपनों के देश में सहित अबतक करीब 40 कृतियाँ हैं।
अशोक कुमार टैगोर ने बिहार सरकार में उद्यमिता विकास पदाधिकारी एवं सृष्टि फाउण्डेशन, पटना के प्रवर्तक अध्य क्ष के रूप में उद्यमिता विकास, ग्रामीण विकास, तकनीकी हस्तारन्त।रण, कौशल विकास, नवाचार तथा स्टाार्ट-अप प्रोत्साहहन देकर एक लाख से ज्यारदा लोगों के जीवन में सकारात्म क हस्त्क्षेप किया है। इनकी जीवन संगिनी डा0 नूतन, डा0 राजेन्द्रै प्रसाद केन्द्री य कृषि विश्वाविद्यालय, पूसा, समस्तीतपुर से मतस्यिकी विज्ञान में उच्च। शिक्षा प्राप्ते कर राज्यी सरकार में अधिकारी हैं। पुत्री सुश्री सृष्टि श्रेया युनिवर्सिटी आफ लंदन से अर्थशास्त्र से स्ना।तकोत्तर शिक्षा प्राप्त कर अपना निजी उद्यम संचालित कर रही हैं, जबकि पुत्र श्रीजीत श्रेय यूनिवर्सिटी आफ लंदन से स्ना्तक शिक्षा के बाद अब यूनिवर्सिटी आफ जूरिच स्वी ट्जरलैंड से आर्टिफिशिल इंटेलिजेंश एवं न्यूररो सायंस में उच्चज शिक्षा प्राप्तट कर रहे हैं। (2026)।
इनकी साहित्य् दृष्टि में परंपरा एवं आधुनिक चिंतन का समन्वटय तथा जीवन के विविध अनुभवों की काव्यांत्मवक अभिव्यीक्ति प्रमुख है। वर्तमान में पटना एवं गुरूग्राम में निवास। संपर्क सूत्र- aktagore9@gmail.com