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प्रेम कोई साधारण भावना नहीं, बल्कि आत्मा का वह पवित्र समर्पण है, जो
परि स्थितियों की बेड़ियों, और समय के थपेड़ों सेपरेहोकर भी अमर रहता है। 'संगमपुर से ईटानगर' की यह दास्तान केवल दो हृदयों के धड़कने की कहानी नहीं है, बल्कि यह वफ़ा, विश्वास, सामाजिक मर्यादाओ, बेबसी और मानवीय संवेदनाओं का एक ऐसा आत्मीय दस्तावेज़ है।
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