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कुछ रिश्ते मिलने के मोहताज नहीं होते… कुछ लोग दूर रहकर भी दिल के सबसे करीब होते हैं।
राम और रीना की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक ऑनलाइन मुलाक़ात Snapchat से शुरू होती है, Instagram और WhatsApp तक पहुँचती है और धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे की ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन जाते हैं।
लेकिन इस रिश्ते की सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि वे कभी आमने-सामने मिले ही नहीं।
राम के दिल में रीना के लिए प्यार बढ़ता जाता है, जबकि रीना की अपनी ज़िंदगी और रिश्तों की उलझनें हैं। मुलाक़ात की कोशिशें होती हैं, इंतज़ार होता है, झगड़े होते हैं और फिर एक दिन रीना अचानक उसकी ज़िंदगी से गायब हो जाती है।
कई साल बाद एक अनजान नंबर से सिर्फ़ इतना संदेश आता है— “RAM, मुझे याद है।”
क्या रीना सच में वापस आई है? वह इतने सालों तक कहाँ थी? और सबसे बड़ा सवाल—उसने राम से कभी मुलाक़ात क्यों नहीं की?
“जो कभी मिला ही नहीं” एक अधूरे रिश्ते, इंतज़ार, मोहब्बत और उन सवालों की कहानी है जिनके जवाब शायद कभी नहीं मिलते। �
Final book
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