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दस दिनों में ग्यारह शहरों की यह यात्रा भारत को रेल, सड़क और स्थानीय जीवन के करीब से देखने की कहानी है। दिल्ली से जलगाँव तक लेखक मंदिरों, घाटों, किलों, बाजारों और अनजान लोगों के बीच सफर करता है। हर शहर अपनी संस्कृति, इतिहास और रोज़मर्रा की जिंदगी के साथ एक नया और अलग अनुभव देता है। रास्ते में हास्य, थकान, दोस्ती, आस्था, छोटी-बड़ी बातचीत और कुछ अनपेक्षित घटनाएँ इस सफर को और भी यादगार बनाती हैं। यह केवल शहरों को देखने की यात्रा नहीं, बल्कि रास्तों, लोगों और अनुभवों के जरिए अपने देश को करीब से जानने और खुद को थोड़ा बेहतर समझने की कहानी है।
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